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क्या आप जानते हैं नदी में सिक्के क्यों फेंके जाते हैं, जानिए 10 हिन्दू परंपराएं

मंगलवार,जून 2, 2020
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गायत्री मंत्र एक ऐसा मंत्र है जो न सिर्फ हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों की जुबान रहता है बल्कि अन्य धर्म के लोग भी इस मंत्र के बारे में
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मंगलवार, 2 जून 2020 को निर्जला एकादशी है। इस दिन प्रातःकाल से लेकर दूसरे दिन द्वादशी की प्रातःकाल तक उपवास करने की अनुशंसा की गई है।
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सोशल मीडिया और यूट्यूब पर शांतिकुंज गायत्री परिवार ब्रह्म वर्चस्व के संस्थापक संत स्वर्गीय श्रीराम शर्मा की एक अमृतवाणी भविष्यवाणी के रूप में प्रचारित हो रही है जिसमें उन्होंने बहुत ही चौंकाने वाले बाते कहीं है। हालांकि इसमें उन्होंने दुनिया के ...
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शास्त्रों में निर्जला एकादशी को लेकर यह वर्णन मिलता है कि इस व्रत का महत्व महर्षि वेदव्यास जी ने भीम को बताया था। अतः इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
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शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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शास्त्रों में मंत्रों को बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी बताया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावी मंत्रों में से एक मंत्र है गायत्री मंत्र।
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इस वर्ष 1 जून 2020, सोमवार को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी 'गंगा' स्वर्ग से अवतरित हुई थीं। गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के पर्व को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
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आभूषणों ने मानव जाति व समाज में अपनी अलग और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे वह सोना-चांदी हो, हीरे हों, रूबी, नीलम, पन्ना, मोती कोई भी रत्न या धातु हों। इनकी चकाचौंध ने हमेशा सभी को आकर्षित किया है। भारतीयों में तो यह प्रतिष्ठा का प्रश्न भी रहता
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मध्यप्रदेश के देवास जिले से करीब 45 किमी दूर हाटपीपल्या गांव के नृसिंह मंदिर में स्थापित है गायत्री माता की एक विचित्र मूर्ति। कहते हैं यहां के मंदिर की नृसिंह भगवान की मूर्ति पानी में तैरती है, लेकिन यहां जो गायत्री माता की मूर्ति है उसका रहस्य कोई ...
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गंगा स्नान से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसी लोगों की मान्यता रहती है। गंगा में लगाई गई एक डुबकी ही श्रद्धालुओं को क्षणभर में पवित्र कर देती है, इसमें रत्तीभर भी संदेह नहीं है।
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वराह पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी, वह दस पापों को नष्ट करती है।
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एक खडगलसेन राजा थे। प्रजा राजा से प्रसन्न थी। राजा व प्रजा धर्म के कार्यों में संलग्न थे, पर राजा को कोई संतान नहीं होने के कारण राजा दु:खी रहते थे।
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प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष माहेश्वरी समाज द्वारा महेश नवमी पर्व 31 मई को 2020, रविवार को मनाया जाएगा।
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भगवान शिव माया के द्वारा मां पार्वती के शरीर से बाहर आते हैं और पार्वती के धूम से व्याप्त स्वरूप को देखकर कहते हैं कि अबसे आप इस वेश में भी पूजी जाएंगी। इसी कारण मां पार्वती का नाम 'देवी धूमावती' पड़ा।
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जम्मू। इस बार की अमरनाथ यात्रा पर संशय गहराता जा रहा है। असमंजस में फंसे हुए अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने अब अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण को 31 मई तक स्थगित किया गया है। यात्रा इस बार 23 जून को शुरू होनी है।
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कान्हा जी की मुस्कान रोके नहीं रुक रही...अकेले ही महल की छत पर बैठे हुए कृष्ण... दूर आकाश में चाँद को निहारते जा रहे हैं...और मंद मंद मुस्कुराते जा रहे हैं...कान्हा बार बार पीछे मुड़ के देख भी लेते हैं की कोई उन्हें देख तो नहीं रहा.. और फिर अनायास ...
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पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि ‘हे देव ! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही? गंगा में डुबकी लगाने से क्या सच में धुलते हैं पाप?
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ना बीबी न भैया “सबसे बड़ा रुपइया” सभी ने सुना होगा। यह पैसा जो सिक्के में या नोटों में भले ही अलग-अलग आकार, रंग-रूप, वजन लिए हुए हो पर जिसकी जेब में ये बसते हैं वो ही इस दुनिया में सबसे रुतबेदार है। इसी के आस-पास सारी दुनिया घूमती है। फिर भी पैसा ...
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क्या दुर्लभ मनुष्य जन्म मिलना, यह भाग्य नहीं है? एक सुसंस्कृत देश की प्रजा के रूप में पहचाने जाना यह भाग्य नहीं है?
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