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कैसे जलाते हैं आप दीपक, ध्यान रखें, सही दिशा में होनी चाहिए दीपक की लौ

गुरुवार,सितम्बर 24, 2020
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धार्मिक शास्त्र और पुराणों के अनुसार हर तीसरे साल अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है। इस मास में भगवान विष्णु का पूजन, जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है। खास तौर पर भगवान कृष्‍ण, भगवद्‍गीता, श्रीराम की आराधना, कथा वाचन और ...
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शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम मास आता है। इसे अधिक मास भी कहा जाता है। यह माह अधिक महत्व का माना गया है।
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हिन्दू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार जब कोई मुहूर्त नहीं निकल रहा हो और किसी कार्य को शीघ्रता से आरंभ करना हो अथवा यात्रा पर जाना हो तो उसके लिए चौघड़िया मुहूर्त देखकर कार्य करना या यात्रा करना उत्तम होता है।
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तांत्रिकों की देवी तारा माता को हिन्दू और बौद्ध दोनों ही धर्मों में पूजा जाता है। तिब्‍बती बौद्ध धर्म के लिए भी हिन्दू धर्म की देवी 'तारा' का काफी महत्‍व है। नवरात्रि में माता तारा की पूजा और साधना करना बहुत ही पुण्य फलदायी और जीवन को पलटने वाला ...
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आश्विन महीने में अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है और 16 अक्टूबर तक चलेगा। आओ जानते हैं इस महत्वपूर्ण माह की 20 सरल और छोटे-छोटे काम।
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श्री राम रक्षा स्तोत्र बुध कौशिक ऋषि द्वारा रचित श्रीराम का स्तुति गान है। इसमें प्रभु श्री राम के अनेकों नाम का गुणगान किया है। आ जानते हैं कि इसका पाठ करने के 10 रहस्य।
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आश्विन महीने में अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है और 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसे मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस माह में धर्म, कर्म, व्रत, पूजा, ध्यान, योग, साधना और आहर संयम का बहुत ही महत्व है। आओ जानते हैं कि अधिकमास में आका आहार कैसे ...
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शारदीय नवरात्र की शुरुआत पितृपक्ष की समाप्ति के बाद हो जाती है। मगर इस बार 165 साल बाद अद्भुत योग बना है। पितृ पक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्र शुरू नहीं होंगे, बल्कि एक महीने के बाद नवरात्रों की शुरुआत होगी।
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परंपराएं निरर्थक या अनावश्यक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी छिपे होते हैं। जानिए ऐसी ही कुछ परंपराओं और उनके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को -
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सभी देवताओं ने हनुमानजी को वरदान दिए। इन वरदानों से ही हनुमानजी परम शक्तिशाली बन गए। आइए जानते हैं 8 शुभ वरदान कौन से हैं...
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दिवाली या दीपावली हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। यह 5 दिवसीय पर्व है, जो धनतेरस से भाई दूज 5 दिनों तक चलता है। दिवाली अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता पर्व है।
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सूर्य की उपासना की प्रमुख बात यह है कि व्यक्ति को सूर्योदय से पूर्व उठ जाना चाहिए। तत्पश्चात स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध, स्वच्‍छ वस्त्र धारण कर ही सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए।
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नमस्कार करने से हमारा अहंकार नष्ट होता है। विनय गुण नम्रता विकसित होती है एवं मन शुद्ध होता है।
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सर्वव्यापक परमात्मा ही भगवान श्री विष्णु हैं। यह सम्पूर्ण विश्व भगवान विष्णु की शक्ति से ही संचालित है। वे निर्गुण भी हैं और सगुण भी।
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अधिक मास में भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है। अधिक मास के माह भर अवश्य पढ़ें भगवान विष्णु के मंत्र...
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गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अनासक्त कर्म यानी 'फल की इच्छा किए बिना कर्म' करने की प्रेरणा दी।
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जो मनुष्य अधिकमास में केवल एक बार श्रीकृष्ण के गुणों में प्रेम करने वाले अपने चित्त को श्रीकृष्ण के चरण कमलों में लगा देते हैं, वे पापों से छूट जाते हैं, फिर उन्हें पाश हाथ में लिए हुए यमदूतों के दर्शन स्वप्न में भी नहीं होते।
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अधिक मास में मथुरा परिक्रमा का बड़ा महत्व है। इस परिक्रमा में होते हैं कृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थलों के दर्शन। माना जाता है कि यह परिक्रमा चौरासी कोस की है
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अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है और 16 अक्टूबर तक चलेगा। आओ जानते हैं इस महत्वपूर्ण माह की 20 काम की बातें।
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