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International Workers Day: श्रमिक दिवस कब मनाया जाता है, क्यों मनाना है जरूरी, जानें 5 खास त‍थ्य

Updated: शुक्रवार, 1 मई 2026 (16:12 IST)
Labour Day 2026: हर साल 1 मई को दुनिया भर में 'अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' या 'मई दिवस' के रूप में मनाया जाता है। 01 मई को मनाया जाने वाला विश्‍व मजदूर दिवस उन मजदूरों और कामगारों को समर्पित है जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और विकास की असली नींव होते हैं।
 
इतिहास: श्रमिक दिवस का इतिहास 19वीं सदी के मजदूर आंदोलनों से जुड़ा है, जब बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और न्यायसंगत मजदूरी की मांग को लेकर हड़तालें और विरोध प्रदर्शन हुए थे। यह दिन कामगारों के अधिकारों, सुरक्षा, समान अवसर और श्रमिक संघों के योगदान को याद करने का अवसर है।
 

क्यों मनाना है जरूरी?

श्रमिक दिवस मनाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि कामगारों के अधिकारों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक जरिया है। इसे मनाना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह दिन मजदूरों को उनके अधिकारों-जैसे न्यूनतम वेतन, सीमित कार्य घंटे और सुरक्षित कार्यस्थल के प्रति सचेत करता है। यह उन लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए अपनी जान गंवाई और आंदोलन किए। समाज में मजदूरों के साथ होने वाले भेदभाव और शोषण को रोकने के लिए यह दिन एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।
 

श्रमिक दिवस के बारे में 5 खास तथ्य

8 घंटे की शिफ्ट की शुरुआत: 19वीं शताब्दी तक मजदूरों को दिन में 15-15 घंटे काम करना पड़ता था। 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने '8 घंटे काम, 8 घंटे मनोरंजन और 8 घंटे आराम' की मांग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल की थी।
 
शिकागो का 'हेमार्केट' कांड: 4 मई 1886 को शिकागो के हेमार्केट में प्रदर्शन के दौरान एक बम धमाका हुआ, जिसमें कई मजदूर और पुलिसकर्मी मारे गए। इसी घटना की याद में 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में चुनने का फैसला लिया गया।
 
भारत में पहली शुरुआत (1923): भारत में पहला मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में मनाया गया था। इसकी शुरुआत 'लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान' ने की थी।
 
लाल झंडे का प्रतीक: भारत में पहली बार जब मजदूर दिवस मनाया गया, तभी पहली बार लाल झंडे का उपयोग मजदूरों के प्रतीक के रूप में किया गया था, जो संघर्ष और एकजुटता का रंग माना जाता है।
 
दुनिया भर में अलग नाम: इसे कई देशों में 'लेबर डे', 'मई दिवस' या 'कामगार दिवस' के नाम से जाना जाता है। 80 से अधिक देशों में इस दिन आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश होता है।
 
भारत और दुनिया के अन्य देशों में इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, रैली, सम्मान समारोह और श्रमिकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन न केवल श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करता है, बल्कि समाज में उनके अधिकारों और सम्मान की जरूरत को भी उजागर करता है।
 
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