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Indian Army Day: थल सेना दिवस: हर सैनिक के साहस को नमन

Written By WD Feature Desk
Updated: गुरुवार, 15 जनवरी 2026 (09:42 IST)
Significance of Indian Army Day: 'जहां तिरंगा अपनी पूरी शान से लहराता है, वहां हमारे वीर जवानों का साहस मुस्कुराता है। सरहद की बर्फीली चोटियों से लेकर तपते रेगिस्तान की धूल तक, जिनकी पदचाप से दुश्मन के हौसले पस्त हो जाते हैं, वो है हमारी भारतीय थल सेना।

आज 15 जनवरी को पूरा देश 'थल सेना दिवस' मना रहा है। यह दिन उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है जब भारतीय सेना की कमान पहली बार एक भारतीय हाथ में आई थी। आइए, आज हम सब मिलकर उन जांबाजों को सलाम करें, जिनके लिए 'राष्ट्र सर्वोपरि' केवल एक नारा नहीं, बल्कि उनके जीवन का उद्देश्य है।'
 
थल सेना दिवस का गौरवशाली इतिहास: 15 जनवरी का दिन भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। वे भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे।

यह दिन ब्रिटिश शासन से पूर्ण सैन्य स्वतंत्रता का प्रतीक है। फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा/ K.M. Cariappa, जिन्हें प्यार से 'किप्पर'/Kipper भी कहा जाता है, स्वतंत्र भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ थे। उनके नेतृत्व और अनुशासन की नींव पर ही आज की आधुनिक भारतीय सेना खड़ी है।
 
आज का दिन उन वीर सपूतों को समर्पित है, जो देश की सीमाओं पर डटकर हमारी सुरक्षा करते हैं। थल सेना दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और शांति के पीछे सैनिकों का अथक परिश्रम और निस्वार्थ सेवा छिपी है।
 
कड़ाके की ठंड हो या तपती गर्मी, दुर्गम पहाड़ हों या रेगिस्तान, भारतीय थल सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। अपने परिवार से दूर रहकर, प्राणों की बाज़ी लगाकर सैनिक राष्ट्र की आन-बान-शान की रक्षा करते हैं।
 
थल सेना दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि हर उस सैनिक को सम्मान देने का अवसर है, जिसने मातृभूमि के लिए अपना आज और कई बार अपना कल भी न्योछावर कर दिया।
 
आज हर भारतीय नागरिक हमारे हर सैनिक के साहस, शौर्य और बलिदान को नमन करता है।
 
जय हिंद!

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