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दमन और दीव, गोवा मुक्ति दिवस आज, जानें इतिहास और महत्व की बातें
History of Daman and Diu Liberation: दमन और दीव, गोवा का हिस्सा बनने से पहले, पुर्तगाली साम्राज्य के अधीन थे। भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी पुर्तगाल ने इन क्षेत्रों को अपने कब्जे में बनाए रखा। भारतीय सरकार ने इन प्रदेशों की स्वतंत्रता के लिए लगातार प्रयास किए। अंततः 1961 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत इन क्षेत्रों को पुर्तगाली साम्राज्य से मुक्त कर दिया और भारत का हिस्सा बना लिया।
इतिहास: गोवा, दमन और दीव का भारत में विलय स्वतंत्रता संग्राम के बाद हुआ था। इन प्रदेशों को 1961 में पुर्तगाली शासन से मुक्त किया गया।
1. पुर्तगाली साम्राज्य का अंत: पुर्तगालियों ने भारत में 150 सालों तक अपनी उपनिवेशी शक्ति बनाए रखी थी। गोवा, दमन और दीव इसके प्रमुख उपनिवेश थे। गोवा 1510 से पुर्तगाली शासन के अधीन था, जबकि दमन और दीव 16वीं शताब्दी के अंत से ही पुर्तगाली नियंत्रण में थे।
2. भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बाद संघर्ष: भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया, लेकिन गोवा, दमन और दीव पर पुर्तगाल का कब्जा बना रहा। भारतीय सरकार ने धीरे-धीरे पुर्तगाल से इन क्षेत्रों की स्वतंत्रता की मांग शुरू की, लेकिन पुर्तगाल ने अपनी हठधर्मिता को बनाए रखा।
3. 1961 में ऑपरेशन विजय: भारत सरकार ने अंततः गोवा, दमन और दीव को मुक्त करने के लिए सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया। 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, और केवल 36 घंटों में पुर्तगाली सेना को पराजित कर दिया।
4. पुर्तगाली सेना की आत्मसमर्पण: भारतीय सेना की भारी दबाव के बाद, पुर्तगालियों ने आत्मसमर्पण कर दिया और 19 दिसंबर 1961 को गोवा, दमन और दीव भारत का हिस्सा बन गए।
महत्व:
1. भारत की संप्रभुता की मजबूती:
गोवा मुक्ति दिवस इस बात का प्रतीक है कि भारत ने अपने संप्रभुता को पूरी तरह से हासिल किया और ब्रिटिश साम्राज्य के बाद बाकी यूरोपीय शक्तियों का भी भारत से भाग्य बदल दिया।
2. संविधान में बदलाव:
1961 में गोवा, दमन और दीव के भारत में विलय के बाद, भारतीय संविधान में भी बदलाव किया गया। इन क्षेत्रों को एक संघ शासित प्रदेश के रूप में शामिल किया गया।
3. संप्रभुता और राष्ट्रीयता का प्रतीक:
गोवा मुक्ति दिवस, भारतीय राष्ट्रीयता की भावना को और मजबूत करता है। यह याद दिलाता है कि भारत अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा।
यह दिवस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है, और यह हमें यह भी याद दिलाता है कि हर देश अपनी स्वतंत्रता को पूरी तरह से हासिल करने के लिए संघर्ष करता है, चाहे वह समय जितना भी लंबा क्यों न हो।
दमन और दीव का इतिहास : दमन पहले पुर्तगालियों के कब्जे में था, इसीलिए इसकी राजधानी भी पहले गोवा की राजधानी हुआ करती थी। 1961 में गोवा और दमन को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया। 1987 ई. में इसे अलग से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया, जिसमें दीव को भी शामिल किया गया।
दमन और दीव गुजरात के जूनागढ़ तथा महाराष्ट्र के मुंबई के समीप अरब सागर में स्थित द्वीप समूह हैं। यह भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, जिसकी राजधानी सिलवासा है। दमन 2000 वर्ष से भी अधिक की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत वाला भारतीय प्रदेश है।
हर साल 19 दिसंबर को गोवा, दमन और दीव में गोवा मुक्ति दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रम होते हैं, जिसमें परेड, सांस्कृतिक प्रदर्शन और शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
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