आपकी रसोई में मौजूद हैं बीमारियों से लड़ने के लिए ये 7 असरदार एंटीबायोटिक्स

7 best natural antibiotics
हम सभी के शरीर में कई बार इंफेक्शन हो जाते हैं, जिससे लड़ने के लिए हमें दवाइयों का सहारा लेना पडता है। लेकिन आपको ये जानकर खुशी होगी कि हमारे किचन में कुछ ऐसी चीजें हमेशा मौजूद रहती है जो बेहतरीन एंटीबायोटिक होती हैं और कई तरह के इंफेक्शन और छोटी-मोटी बीमारियों से बचा सकती है। आइए, जानते हैं किचन में मौजूद ऐसी ही चीजों के बारे में जिन्हें एंटीबायोटिक की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं -

लहसुन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है। इसमें एंटीफंगल और एंटीवायरल तत्व मौजूद होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार लहसुन में पाया जाने वाला सल्फर कंपाउंड एलीसिन प्राकृतिक एंटीबायोटिक के समान कार्य करते हैं। इसके अलावा, लहसुन में कई प्रकार के विटामिन, न्यूट्रिएंट्स और मिनेरल्स होते हैं जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। लहसुन आंतों में होने वाले पैरासाइट्स को खत्म करता है।
प्राकृतिक चिकित्सा में शहद को सबसे कारकर में से एक माना जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमैटोरी (सूजन कम करने वाला) और एंटीसेप्टीक गुण होते हैं। अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार शहद में इंफेक्शन से कई स्तरों पर लड़ने की ताकत होती है। इसके इस गुण के कारण बैक्टेरिया शहद के इस्तेमाल के बाद पनप नहीं पाते।
साल 2001 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अजवाइन के तेल में बैक्टेरिया से लड़ने की शक्ति भरपूर मात्रा में होती है। इसमें कार्वाक्रोल, एक केमिल्कल कंपाउंड, पाया जाता है जिससे इंफेक्शन में कमी आती है और अन्य किसी पारंपरिक एंटीबायोटिक्स की तरह यह प्रभावशाली होता है।

जैतून की पत्तियों के सत (extract) में विभिन्न प्रकार के बैक्टेरिया इंफेक्शन के इलाज के गुण होते हैं। जैतून की पत्तियों में काफी मात्रा में एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है जिससे यह बैक्टेरिया और फंगी से बचाव करती हैं। इनमें एंटीइंफ्लेमैटोरी गुण भी होते है जिससे सूजन आसानी से उतर जाती है।
5. हल्दी :
आयुर्वेद में हल्दी को गुणों की खान समझा जाता है। हल्दी में एंटीबायोटिक गुण भरपूर मात्रा में होते हैं जिनके कारण यह बैक्टेरिया का नाश करती है और शरीर के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही यह घाव होने पर यह बैक्टेरिया इंफेक्शन होने से भी रोकती है।

6. : अदरक में प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण भरपूर होते हैं और इसके इन्हीं गुणों के कारण यह बैक्टेरिया जनित बहुत सी बिमारियों से बचाव करता है। ताजे अदरक में एक प्रकार का एंटीबायोटिक प्रभाव होता है जो खाने से पैदा होने वाले पैथोगेंस (pathogens), इंफेक्शन फैलाने वाले एजेंट, से हमें सुरक्षित रखता है। अदरक में श्वसन तंत्र और मसूडों पर होने वाले बैक्टेरियल हमले से बचाने के गुण भी भरपूर होते हैं।
7. : नीम की एंटीबायोटिक के रूप में पहचान हम सभी को है। नीम त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा करने वाले बैक्टेरिया से लड़ता है। एंटीबायोटिक से पृथक नीम का गुण यह है कि इसके हमेशा इस्तेमाल के बाद भी बैक्टेरिया पर इसका असर खत्म नहीं होता। त्वचा के अलावा नीम मुख की समस्याओं जैसे केविटी, प्लांक़, जिंजिविटिस और अन्य मसूड़ों संबंधी बिमारियों से बचाव करता है।

 

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