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किसने बनाईं अयोध्या राम मंदिर के राम दरबार की सुंदर मूर्तियां, क्यों लगे बनाने में 8 माह

Updated: बुधवार, 8 अप्रैल 2026 (18:37 IST)
अयोध्या में बने भव्य श्रीराम मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप विग्रह स्थापित है, जबकि प्रथम तल पर भव्य श्रीराम दरबार बनाया गया है। राम दरबार में श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमानजी की सुंदर मूर्तियां विराजित हैं। राम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित होने वाले राम दरबार की महिमा स्थापत्य की दृष्टि से भी अतुलनीय है। आओ जानते हैं मूर्तिकार और मूर्ति के बारे में। ALSO READ: अद्भुत... अलौकिक...अविस्मरणीय! कैसा है श्रीराम दरबार, जानिए इसकी अनोखी विशेषताएं
 
मूर्तियों की खासियत:
सिंहासन समेत राम दरबार की मूर्ति की ऊंचाई कुल 7 फुट हो है। हनुमान और भरत की मूर्ति बैठी मुद्रा में है, जिसकी ऊंचाई ढाई फीट है। लक्ष्मण व शत्रुघ्न की मूर्ति खड़ी मुद्रा में है, इनकी ऊंचाई 3-3 फीट है। राम दरबार का निर्माण जिस संगमरमर पत्थर से किया गया है, वह न केवल मजबूती में अद्वितीय है, बल्कि उनमें जो चमक और आभा है, वह सदियों तक धूमिल नहीं होगी। इस पत्थर की खासियत यह है कि इसे जितना धोया जाएगा, स्नान कराया जाएगा, उतना ही इसकी चमक बढ़ेगी।
 
सत्यनारायण पांडेय मूर्तिकार:
राम दरबार को गढ़ने वाले जयपुर के प्रख्यात मूर्तिकार सत्य नारायण पांडेय हैं। सत्य नारायण एक मूर्तिकार और पांडे मूर्ति भंडार के प्रबंध निदेशक हैं। उन्‍होंने बताया कि हर दिन वह दो घंटे की पूजा के बाद 10 घंटे मूर्तियों को तराशने में लगाते थे। इन मूर्तियों को तैयार करने से पहले हर दिन प्रभु राम की 540 बार परिक्रमा करते थे। इस मूर्ति को बनाने से पहले मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय 2 घंटे प्रभु राम की परिक्रमा और हनुमान चालीसा का पाठ करते थे। ऐसा करने के पीछे उद्देश्य था कि उनके मन में राम-राम रम जाए। इसलिए राम दरबार की मूर्तियां तैयार करने में 8 महीना का समय लगा।
 
पांडेय के अनुसार राम दरबार के निर्माण के लिए संगमरमर की जिस शिला का चयन किया गया है वह करीब 40 साल पुरानी है। पांडेय का दावा है कि एक हजार साल तक राम दरबार की मूर्ति सुरक्षित रहेगी। मूर्तिकार सत्य नारायण ने बताया कि जब यह पत्थर चुना गया, उसके बाद आईआईटी हैदराबाद के वैज्ञानिकों की टीम ने इसकी वैज्ञानिक जांच की। मौसम, समय और वातावरण के प्रभाव को झेलने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें ताकत, नमी सोखने की दर, घर्षण क्षमता और तापमान सहिष्णुता जैसे पहलुओं को परखा गया। विभिन्न प्रयोगशालाओं में जांच के बाद विशेषज्ञों ने निर्माण की हरी झंडी दी।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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