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Motivational Story | मन का संतुलन

Story
यह कहानी उन लोगों को लिए हैं जो किसी उच्चपद पर बैठे हुए हैं और मान सम्मान प्राप्त कर गौरव अनुभव कर रहे हैं। कई बार ऐसा होता है कि पद खोने का डर बना रहता है और जब पद खो जाता है तो व्यक्ति का मान सम्मान भी चला जाता है। तो पढ़ते हैं चीन की एक शानदार कहानी।
 
 
चीन में क्वांग नामके एक राजा थे। उन्होंने अपने प्रधानमंत्री शूनशुनाओ को तीन बार प्रधानमंत्री पद पर बैठाया और तीन बार हटाया, लेकिन वे न पद पर बैठाये जाने पर प्रसन्न हुए, न उतारे जाने पर दुखी।
 
 
चीन के विद्वान किन वू ने उनसे उनके मन के संतुलन का राज पूछा तो उन्होंने कहा कि जब मुझे प्रधानमंत्री बनाया गया तो मैंने सोचा कि अस्वीकार करना राजा का अपमान होगा, इसलिए अपना कर्तव्य निभाता रहा। फिर जब मुझे निकाला गया तो मैंने सोचा कि मेरी उपयोगिता नहीं रही होगी तो मैं क्यों व्यर्थ ही पद से चिपका रहूँ।
 
 
मेरा पद से लगाव कभी नहीं रहा क्योंकि पद ने मुझे कुछ दिया नहीं, न उसके चले जाने से मेरा कुछ गया। जो भी सम्मान मिला, वह पद का था, जो चला गया। यदि मेरा था तो वह तो कभी कम होने वाला नहीं। मेरा तो सिर्फ मैं ही हूँ। मैंने दोनों ही स्थितियों में मन के संतुलन को बनाए रखा।

- ओशो रजनीश के किस्से और कहानियों से साभार
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें