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कही-अनकही 23 : हर एक 'फ्रेंड' ज़रूरी होता है!

बुधवार,अप्रैल 13, 2022
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एना पर चिल्लाते हुए, उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करते हुए आदि ने धीरे से फ़ोन बंद करने की कोशिश की। उसे लगा एना ने नहीं देखा। आदि ने कॉल डिटेल डिलीट कर दिए। फिर मेसेज भी डिलीट कर दिए। और नेहा ने एना का आदि पर भरोसा डिलीट कर दिया, ट्रस्ट डेफिसिट की तर
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'अरे चुप क्यों हो गए? गाओ-गाओ, मुझे तो गाने का बड़ा शौक है।' आज उनका मूड बिलकुल अलग था। आज वे मुस्कुरा रहीं थीं। उनके चेहरे की तनी रहने वाली नसें आज सहज थीं इसलिए थोड़ी देर में सब सहज हो गए। थोड़ी देर में, थोड़ी देर के लिए सब भूल गए कि वे कौन हैं और हम ...
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आरती और अजय भी सोसायटी की वेलेन्टाइन डे पार्टी में पहुँचे। नृत्य चल रहा था। " तुम भी शामिल हो जाओ।" अजय ने बड़े ही प्यार से आरती को कहा। " अरे नहीं, मुझसे नृत्य नहीं होगा।" " अरे, हो जाएगा। जाओ भी।"
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डोरबेल बजी सामने पार्सल लिए डिलेवरी बॉय खड़ा था। सुहानी ने पार्सल ले लिया। उसने बिना किसी उत्सुकता के पार्सल को सोफे पर बोझिल मन से रख दिया।
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वर्क-फ्रॉम-होम सपने जैसा लगता था। लेकिन शुरुआत में जब कोरोना काल के चलते सभी को वर्क-फ्रॉम-होम करना पड़ा तो घर और ऑफिस के कामों में सामंजस्य बनाने में काफी समय लग गया... घर के कामों के साथ अधिकाँश बोझ महिलाओं पर आया, क्योंकि अब चूँकि सब घर पर ही थे, ...
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"भैया! फूल देना ,आज मुझे लाल नहीं पीले फूल चाहिए, इसलिए आप मुझे आज सिर्फ पीले फूल ही देना। वह एक नोट बढ़ाकर मुस्कुराते हुए बोली।" "दीदी! आप रोज जिस कीमत पर फूल लेते हैं, उतने में आज पीले फूल नहीं आएंगे। ऊपर पैसे देने होगे।"
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ऑफिस के बाहर बूढ़ी भिक्षुक महिला जिसके फटेहाल देख निष्ठुर मन भी एक पल को पिघल जाए। सुहानी उसे देख पर्स से अपना टिफिन निकाल कर देने लगी। परन्तु उसने नहीं चाहिए का इशारा कर दिया। "अम्मा मना मत करो ये खाने की चीज है, ले लो तुम्हारा पेट ...
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"बधाई हो! सुमीता तुम भी सास बन गई। बहुत बढ़िया दामाद ढूंढा है। राम-सीता सी सुंदर जोड़ी लग रही है। लेकिन एक बात कहूँ... मुझे तुम्हारा अपनी बेटी का यूँ बड़े परिवार में रिश्ता तय करना समझ नहीं आया?"
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बस एना, तुम आ जाओ मेरे पास और फिर तुम सबका ध्यान रख लेना, मैं तुम्हारा रख लूंगा । हम दोनों आराम से प्यार से पूरी ज़िंदगी साथ रहेंगे। सोचो, साथ रहेंगे तो कितनी आसान लाइफ हो जाएगी?’
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दादी ने तोहफे में दे दी जीजाजी को वही ‘सोने की गिन्नी’ जो एना के पापा ने आदि के पापा को दी थी। जीजाजी ने मना किया, लेकिन दादीजी कहां मानने वाली थीं... फिर एना ने जीजाजी के पैर छुए। जीजाजी ने वही सोने की गिन्नी एना को आशीर्वाद स्वरुप दे दी।
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‘एना, आज से गांठ बांध लो, न यहां की कोई बात मायके में करनी है, न मायके की बात यहां। अब तुम यहीं की हो, यहीं के हिसाब से रहो और नौकरी छोड़ दो तुम। क्या करोगी 10 घंटे की नौकरी कर के? पति का ख्याल कैसे रखोगी?’
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परिदृश्य : एना और आदि की शादी है और आदि का परिवार एना के माता-पिता को आश्वासन दे रहा है... ‘आप चिंता न करें भाईसाहब, हमारे घर भी दो-दो बेटियां हैं । जैसी वो दोनों, वैसी ही एना भी हमारे लिए रहेगी।’
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रिश्तों में स्पष्ट संचार और वार्तलाप बेहद आवश्यक है, मस्ती-मजाक, रूठना-मनाना भी रिश्तों को मजबूती देता है, एक-दूसरे को समय देना और एक-दूसरे की निजता का भी सम्मान करना ज़रूरी है... लेकिन क्या इसकी आड़ में हर बात पर ‘अबोला’ सही है?
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मंच पर बड़े-बड़े अक्षरों में कार्यक्रम का विषय लिखा था अपनी मातृभाषा हिन्दी को कैसे बचाएं। उसका मन कह रहा था कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है या मात्र एक भाषा....!
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जन्मदिन के एक दिन पहले, रौनक रिद्धि को डिनर पर ले गया, जहाँ वह पूरे समय अपने फ़ोन पर ही लगा रहा। खाना हो गया और दोनों घर आ गए। 12 बजे रात को बड़े बेमन से रौनक ने रिद्धि से केक कटवाया, जिससे रिद्धि उदास हो गई।
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सूरज क्षितिज की गोद से निकला, बच्चा पालने से- वही स्निग्धता, वही लाली, वही खुमार, वही रोशनी। मैं बरामदे में बैठा था। बच्चे ने दरवाजे से झांका। मैंने मुस्कुराकर पुकारा।
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रामधन अहीर के द्वार एक साधू आकर बोला- बच्चा तेरा कल्याण हो, कुछ साधू पर श्रद्धा कर। रामधन ने जाकर स्त्री से कहा- साधू द्वार पर आए हैं, उन्हें कुछ दे दे।
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‘सादगी’ के नाम पर दिखावा करने वाले ये पढ़े-लिखे आधुनिक परिवार के लोग क्या कभी अपने खुद के बेटे की ख़ुशी की कीमत पैसे से आंकना छोड़ सकेंगे? क्या ये पढ़े-लिखे बड़े कॉलेजों से पढ़ने वाले लड़के अपने घर में अपना मुंह खोल कर बदलते हुए समाज और परिदृश्य का सच अपने ...
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क्या कभी मर्द अपनी पत्नी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते? या प्रोत्साहित करने का दिखावा कर उन्हें घर बैठाना चाहते हैं? क्या ‘सपोर्ट’ के नाम पर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होते देखना उनके अहम् को ठेस पहुंचाता है? ये सभी ‘कही-अनकही’ बातें हैं और इसका ...
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कोई अपने परिवार के सदस्यों को खाने-पीने से कैसे रोक सकता है? इतनी घृणित मानसिकता दूध के जले लोगों की ही हो सकती है। इन ‘कही-अनकही’ बातों के दर्द से रीसते घावों को सहलाते हुए उस दिन एक साथ फिर चाय-कॉफ़ी का आनंद उठाया।
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प्रेम विवाह के बाद जब पति कुछ पल भी अपनी पत्नी के साथ न बिताना चाहे, तो वहां प्रेम कैसा? खैर, ये तो ‘कही-अनकही’ बातें हैं, क्योंकि आज भी न जाने कितनी लड़कियां उम्मीदों से शादी करती हैं और फिर उन्हीं उम्मीदों का गला घोंट दिया जाता है, उन्हीं लड़कियों ...
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‘आदि, क्या बना दूं खाने में?’ ‘देख लो क्या है... आलू हों तो आलू की सब्जी बना दो रस वाली...’ ‘ठीक है, तुम्हारे लिए ताज़ा बना देती हूं और मैं सुबह के दाल-चावल फ्राय कर के खा लूंगी... फालतू वेस्ट हो जाएगा वरना...’
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एना! ये क्या कर रही हो तुम? रख दो मेरा फ़ोन... हाथ भी मत लगाना...’ ‘अरे? देख रही हूं किसका फ़ोन या मैसेज था... खुद मेरा फ़ोन चेक करते हो, मैसेज चेक करते हो... यहां तक मैं अपने घरवालों से क्या बात करती हूं, ये तक हर रोज़ चेक करते हो...’
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‘फालतू बात छोड़ो... कामवाली आज नहीं आएगी, उसकी लड़की बोल के गयी है, बस वही बता रहा था... मैं तुम्हारे शाम को घर आने से पहले टूर पर निकल जाऊंगा... फ्लाइट है मेरी 4 बजे...’ ‘कौनसी फ्लाइट से जा रहे हो?’ ‘देखता हूं... तुम पैकिंग कर के तुम्हारी मम्मी के ...
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हर बच्चा चाहता है कि उसके माता-पिता उसके घर में रहें और उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो। लेकिन किस कीमत पर? अपनी पत्नी की खुशियों को उजाड़ कर? जब आप एक पौधा घर लाते हैं, तो भी उसकी परवरिश के लिए उचित खाद-पानी देते हैं, न कि उस पौधे से उम्मीद ...
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आज भी कई महिलाएं हैं जो किसी न किसी प्रकार की यंत्रणा सह रही हैं, और चुप हैं। किसी न किसी प्रकार से उनपर कोई न कोई अत्याचार हो रहा है चाहे मानसिक हो, शारीरिक हो या आर्थिक, जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, क्योंकि शायद वह इतना 'आम' है कि उसके ...
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नीना ने घर पहुंच मां से फोन पर बात की तो पता चला कि, वे काफी बीमार है, यह सुनते ही वे तुरंत मां को अपने घर ले आई। कुछ दिन में लॉकडाउन हो गया। कोरोना के बादलों के बीच में जब भी मां नीना को सेवा के बदले आशीर्वाद देती, तो लगता बादलों को चीर सूर्य, उसके ...
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’दादाजी, मैं साइकिल चलाना नहीं सीखूंगी।’ दादाजी ने अखबार से चेहरा निकालते हुए पूछा, ’क्यों? गिर पड़ी क्या?’ मैंने अपने सही-सलामत कोहनी और घुटने दिखाते हुए कहा, ’नहीं तो! मैं कहां गिरी? ये देख लो।’
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धमम् तपड़......धमम् तपड़.... धमम् तपड़... जसोदाबाई नीम तले ढोलक ठोक रही थी। बेसुरा, बेताल। ढोलक की दोनों चाटी पर पूरे हाथ पड़ रहे थे और बेढब आवाज़ दूर तक जा रही थी। आज से पहले जसोदाबाई को इस रूप में किसी ने नहीं देखा था। ढोलक पर सदा लटकनेवाले झालरदार ...
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आज के बूफे के दौर से कुछ वर्षों पीछे जाकर यदि सोच सकें तो सहभोज की पंगत याद कर लीजिए.....।
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जाह्नवी और तन्मय की नई-नई शादी हुई थी, तन्मय के ऑफ़िस जाते समय जाह्नवी उसे रोज़ छोड़ने नीचे आती थी, उसी समय प्रिया बालकनी में बैठकर अख़बार पढ़ा करती। एक दिन जाह्नवी लौट रही थी तभी प्रिया और जाह्नवी की नज़रें मिल गईं, प्रिया ने हंसकर हाथ हिला दिया। फिर तो ...
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लघुकथा : हिसाब

बुधवार,दिसंबर 23, 2020
मिस शालू के ऑफिस में आते ही सबकी निगाहें उन पर टिक गई। इठलाती, झूमती, कुछ बहकी सी, आंखों में अजीब-सा लालपन लिए सभी सहकर्मियों से हंसी-मजाक करने लगी। रिसेप्शन पर बैठे अखिल से तो कहा सुनी हो गई।
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