dharma sangrah

हिन्दी कविता : रेवड़ियां बंट रही हैं...

Updated: शुक्रवार, 8 सितम्बर 2017 (12:50 IST)
शिक्षा का सम्मान बिकाऊ है भाई,
पैरों पर गिरना टिकाऊ है भाई।
 
तुम मेरे हो तो आ जाओ मिल जाएगा,
मैं अध्यक्ष हूं मैडल तुम पर खिल जाएगा।
 
क्या हुआ गर शिष्याओं को तुमने छेड़ा है,
क्या हुआ गर शिक्षा को तुमने तोड़ा-मोड़ा है।
 
क्या हुआ गर माता-पिता को दी तुमने हाला है,
मत डरो समिति का अध्यक्ष तुम्हारा साला है।
 
शिक्षा को भरे बाजारों में तुमने बेचा है,
ट्यूशन में अच्छा जलवा तुमने खेंचा है।
 
क्या हुआ गर शिष्यों के संग बैठ सुरापान किया,
क्या हुआ गर विद्या के मंदिर का अपमान किया।
 
सम्मान की सूची में सबसे ऊपर नाम तेरा,
नोटों की गड्डी में बन गया काम तेरा।
 
अपने-अपनों को रेवड़ियां बांट रहे,
दीमक बनकर ये सब शिक्षा को चाट रहे।
 
योग्य शिक्षक राजनीति में पिसता है,
चरण वंदना का सम्मानों से रिश्ता है।
 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

अगला लेख