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राजनीति पर कविता : क्यों ? क्यों ? क्यों ?

Updated: शनिवार, 16 दिसंबर 2017 (16:28 IST)
येन-केन -प्रकारेण सत्ता को पा जाने की ही चाह क्यों है ?
राजनीति अपने स्थापित आदर्शों से यों गुमराह क्यों है ?
 
सर्वशक्तिमान मतदाता इतना निरीह और बेबस क्यों हैं ?
चुनाव प्रचार में उछाले गए मुद्दे इतने बेहूदे और बेकस क्यों हैं ?
 
सियासत में सिद्धान्तहीन लोगों की निर्विघ्न चलती मनमानी क्यों है ?
राजनीति की राह सुयोग्य युवाओं  के लिए अनजानी क्यों है ?
 
जनशक्ति अपनी सामर्थ्य से बिलकुल अनजान, ऊंघती, सोती क्यों है ?
राजनीति कुछ हठधर्मियों की बरबस बन गई बपौती क्यों है ?
 
गुजरात की चुनावी गहमा गहमी से ये ही सब संकेत मिले हैं। 
क्या चिन्तनशील मनों को चिन्तित करने वाले नहीं ये सिलसिले हैं ?
 
एक परिपक्व प्रजातन्त्र में जाति, धर्म, जनेऊ, मंदिर ही क्या मौजूं चर्चा के विषय हैं ?
यह प्रजातन्त्र ऐसे ही चले क्या यही बस हम सबका निर्णय है ?
 
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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