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हिन्दी कविता : हर घर पहुंचानी है जल-गंगा

Updated: शुक्रवार, 1 नवंबर 2019 (14:05 IST)
वर्षा ने भर दिये ताल सब,
नदियां हुईं लबालब।
खेत हुए सरसब्ज सभी,
उगेंगी सब फसलें अब || 1 || 
 
बांध भरे आकंठ,
खुलें गेटों से बही जलधारें। 
विद्युत पूर्ति हुई मनमानी,
पूरे सब अरमान हमारे || 2 || 
 
जहां हुई अतिवृष्टि, बाढ़,
उन क्षेत्रों की चिंता हैं।
उन नुकसानों की भरपाई भरसक,
शासन को करना है || 3 ||
 
अब जल-संरक्षण, जल प्रदाय पर
योजनाबद्ध मुहीम चलानी।
अब तक वंचित हर घर तक
पहुंचाना है नल से पानी || 4 ||

 
प्रकृति के जल-वरदान को,
सजग होकर सहेजना है अब।
हर घर तक जल गंगा की
निर्मल धार भेजना है अब || 5 ||
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें
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