sundarkand

हिन्दी कविता : अगर बेटी

Updated: गुरुवार, 24 अगस्त 2017 (15:23 IST)
अगर बेटी को सुखी देखना चाहते हैं, तो बहू का सम्मान कीजिए।
अगर बीवी से प्यार करते हैं, तो बहन को स्वीकार कीजिए।
अगर मां की ममता चाहते हैं, तो कन्या का दान कीजिए।
अगर यह सब सही है, तो बेटी पैदा कर स्वयं पर अभिमान कीजिए।
 
नोट : एक बेटी ही है, जो कि हर रूप में हमारे साथ रहती है। बेटियों से भी मेरा निवेदन है कि वे भी अपनी जड़ें स्वयं न खोदें, क्योंकि वे ही सृष्टि की आधारशिला हैं।
 
लेखक के बारे में
रामध्यान यादव 'ध्यानी'

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी, तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल होने पर संशय

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

अगला लेख