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हिन्दी कविता : मां दुर्गा अवतरणी...

Updated: बुधवार, 13 सितम्बर 2017 (10:12 IST)
मन हरणी घनाक्षरी
 
8887 पदांत लघु गुरु
 
मां मस्तक का चंदन,
मां फूलों की है बगिया।
मां धरा-सी विस्तारित,
मां ही मेरी दुनिया।
 
मां चांद जैसी शीतल,
मां मखमल-सी नर्म।
मां सृष्टि का सरोकार,
सबसे बड़ा धर्म।
 
सीता-सी सहनशील,
मां दुर्गा अवतरणी।
माता के श्रीचरणों में,
मेरी है वैतरणी।
 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

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