suvichar

प्रेम पर हिन्दी कविता : रूह के रिश्ते

Updated: गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020 (13:17 IST)
चाहे कितना भी तुम मना करो,
मान भी जाओ कि तुम मेरी हो।
तपते जीवन की धूपों में,
तुम शीतल छांव घनेरी हो।
 
सब रिश्तों से फुरसत,
मिल जाए तो।
आ जाना जल्दी से,
ऐसा न हो देरी हो।
 
रूह के रास्ते पर,
हम-तुम खड़े हुए।
अब न रुकना तुम,
चाहे रात अंधेरी हो।
 
देह तुम्हारी बंटी,
हुई है रिश्तों में।
कई जन्मों तक रूह,
सदा से मेरी हो।
 
अब इतना भी तुम,
मुझको न तरसाओ।
तुम मेरे प्यार की,
जीत सुनहरी हो।
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

अगला लेख