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हिन्दी कविता : जी लेना है जी भर...

Updated: मंगलवार, 7 अगस्त 2018 (11:20 IST)
हर दिन, हर पल, हर सांस तुझे दी,
प्रभु ने परम दुलार से।
मत जीना ओ! नादान,
जिंदगी जैसे मिली उधार से।।1।।
 
हिचकोले तो हैं जीवनसागर की,
यात्रा की सहज शर्त।
नाव बचानी है केवल,
अनघट घातक मझधार से।। 2।।
 
हर पल को जीवन से भरना है,
जीकर परम तमन्ना से।
कह सकें कि मैंने जिया जी भर,
जब भी जाएं संसार से।।3।।
 
बने जीवनादर्श राम की,
पुरुषोत्तम मर्यादा वहन।
और लोकनायक कान्हा की,
लीलामय श्रृंगार से।।4।।
 
परम दिव्य थी युति वह,
तुलसी की मानस भी हो गई अमर।
निर्मल बही कथा-गंगा,
राम पर शंकर के प्यार से।।5।।
 
हो निष्कपट समर्पण,
उक्त आदर्शों के प्रतिमानों में।
समृद्ध हो देश-समाज,
हमारे सार्थक जीवन-व्यवहार से।।6।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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