शुक्रवार, 30 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. poem on snake

हिन्दी कविता : सांप

poem on snake
सांप 
मैं डरती हूं तुमसे
तुम्हारे फुंफकारने से
तुम्हारे डंसने से
मैंने सुना है
तुम्हारी फुंफकार के बारे में
डंक के बारे में
देखा नहीं है
फिर भी बचती हूं
तुमसे 
या बचा लेती हूं
तुम्हें 
खुद से
सांप
मैं भी सीखना चाहती हूं ये फन
ताकि लोग डरे
मेरी भी फुंफकार से
डंक से
 
एक डर का अहसास
आसान कर देता है
कितने काम।