suvichar

मजदूर दिवस पर कविता : संघर्ष का सूर्योदय

Published: गुरुवार, 1 मई 2025 (11:47 IST)
धूप की पहली किरण,
उजागर करती अनगिनत चेहरे,
जो झुकते हैं धरती पर,
उठाते हैं भार,
बनाते हैं राहें।
हाथों में खुरदरापन,
धमनियों में बहता पसीना,
आंखों में संकल्प की ज्वाला,
हर सुबह एक नया युद्ध,
अस्तित्व की रक्षा का।
ईंटों की ठंडी छुअन,
लोहे की तपती गर्मी,
खदानों की घुटन भरी सांसें,
कारखानों का शोरगुल,
यह उनकी दुनिया है।
 
कोई सपना बुनता है छोटे घर का,
कोई बच्चों की हंसी के लिए जूझता है,
कोई बेहतर कल की उम्मीद में,
सहता है अन्याय,
चुपचाप भरता है घाव।
अधिकारों की दबी आवाज़ें,
शोषण की कड़वी कहानियां,
पर हौसला चट्टान सा अटल,
एकजुट होने की शक्ति,
संघर्ष का बीज अंकुरित होता है।
 
लम्बी और कठिन यात्रा,
अंधेरी सुरंगों से रोशनी की ओर,
हर मुश्किल कदम पर,
बढ़ती जाती है दृढ़ता,
जन्म लेती है सफलता।
वे नींव के पत्थर हैं,
हर इमारत, हर प्रगति के पीछे,
उनकी अनथक मेहनत का फल,
आज चमक रहा है,
कल और चमकेगा।
 
यह दिवस मेरा है,
लाखों अनसुनी आवाज़ों का,
जो बनाते हैं दुनिया को,
अपनी निष्ठा और श्रम से,
सलाम है उनकी जिजीविषा को।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

आंदोलित युवा और संवाद की आवश्यकता

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

इंदौर में साहित्य की विविध विधाओं का संगम: जनवादी लेखक संघ का 150वाँ रचना पाठ संपन्न

अगला लेख