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कुंडलिया छंद : हनुमत स्तवन

Updated: गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 (16:41 IST)
1
बलवीरा हनुमंत तुम, संकट मोचन नाम।
रामदूत अतुलित प्रभा, त्रिभुवन पूजित काम।।
त्रिभुवन पूजित काम, दहन लंका  करि डारे।
लांघा सिंधु सुदूर, सिया के कष्ट निवारे।
कह सुशील कविराय, आप अतुलित रणधीरा।
हृदय विराजो आप, पवनसुत जय बलवीरा।।
 
2
माता अंजनि लाल तुम, राम भक्त हनुमान।
भक्ति शक्ति संगम प्रबल, जय जय कृपा निधान।।
जय जय कृपा निधान, पूजते चरण तुम्हारे।
हे हनु दया निधान, कष्ट सब हरो हमारे।
करुणा सागर आप, आप हो भाग्य विधाता।
कर लंका का ध्वंस, खोज लीं सीता माता।।

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लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

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