biodatamaker

हिंदी कविता : चला सखी घूम आई माई के दुआरे

Updated: गुरुवार, 16 मई 2024 (14:00 IST)
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।
मथवा टिकाय आई माई के दुआरे।
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।
टिकुई चढ़ाए आई माई के दुआरे।
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।
ऊंचे पहाड़ी पर माई क दरबार सजा बा।
ढोल बजत बा जयकारा लगा बा।
चला चुनरी चढाय आई माई के दुआरे।
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।
दुनिया में माई के नाम बड़ा बा।
बिंध्याचल माई के धाम बड़ा बा।
भगिया संवार आई माई के दुआरे।
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।
माई हमार है दुनिया के महारानी।
दुःख करें दूर भरे झोलियां खाली।
चला नारियल चढ़ाय आई माई के दुआरे।
चला सखी घूम आई माई के दुआरे।

(यहां पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
लेखक के बारे में
राकेशधर द्विवेदी

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

अगला लेख