ramcharitmanas

कविता : मधुमास

Updated: सोमवार, 22 जनवरी 2018 (17:11 IST)
है आसपास,
स्वप्निल गुंजित मधुमास।
 
तुंग हिमालय के स्वर्णाभ शिखर,
अरुणिम आभा चहुंओर बिखर।
 
नव्य जीवन का रजत प्रसार,
मधुकर-सा गुंजित अपार।
 
सुरभित मलयज मंद पवन,
नील निर्मल शुभ्र गगन।
 
मृदु अधरों पर मधु आमंत्रण,
नयनों का है नेह निमंत्रण।
 
बासंती सोलह सिंगार,
सतरंगी फूलों की बहार।
 
पीत पुष्प आखर से,
उपवन हैं बाखर से।
 
शतदल खिली कमलिनी,
गंधित रसवंती कामिनी।
 
कंपित अधरों का मकरंद,
किसलय कंपित मन के छंद।
 
मंजरियों में बौराई आमों की गंध,
अभिसारी गीतों में प्रेम के आबंध। 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

80s retro look trend : 80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

हिंदी दिवस 2026: हिंदी नहीं रही अब पहले जैसी, फिर भी दुनिया में बढ़ता जा रहा इसका दबदबा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कृष्ण मोहन झा की किताब "डा मोहन भागवत संदेश" का विमोचन

पेरिस में बना यूरोप का सबसे बड़ा अक्षरधाम मंदिर

ब्रिक्स से भारत क्या हासिल कर सकता है...?

अगला लेख