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कविता : उस्ताद जी माफ करना

Updated: सोमवार, 7 जनवरी 2019 (16:57 IST)
- पंकज सिंह 

लम्बी कविता कहने के आदी कवि पर
किया प्रहार
मंच पर आया तो
समझ ले करवाऊंगा अंडे टमाटर से तेरा संहार
चेले के तन बदन में मच गया 
हाहाकार
बेचारा क्या कहता - वाह उस्ताद
खूब किया दुलार
 
गुरु ने समझाया
अपने पास बुलाया
इन्टरनेट की स्पीड से जमाना भाग रहा है
अपने दिमाग को तू पैदल चला रहा है
किस के पास इतनी फुर्सत है
प्रेमिका को खत लिखने का नहीं वक्त है
 
चेले ने गांठ बांध ली
मंच पर वाचन करने की तैयारी कर ली
 
दिल में मेरे नहीं है दरवाजा
ऐ हवा जिधर से आना हो आजा
मन करे उतनी देर ठहर जा
उकता जाये तो जा जा
 
एक बात का ध्यान रखना
मी टू में ना फसाना
 
गठबंधन करना हो तो चुनावी करना
स्वार्थ सिद्द होने के बाद रस्ते अलग अलग समझना
 
हवा तेरा काम है राफेल की तरह उड़ना
बोफोर्स समझ गरजने मत लगना
 
मंदिर मस्जिद का सा झगडा मत करना
कानूनी लड़ाई में जनाजा ना निकल जाये, वादा करना 
 
भारत पाकिस्तान की सी कंटीली दीवार मत खींचना 
हर रोज खुद का ताबूत दिल में पड़ेगा दफनाना
 
हवा हवा बनकर रहना
जिन्दा रखने के लिए ही सही आती जाती रहना
 
होठों को जब तू छू छू कर जाए
लाली तेरी मुझ पर छाए
नथुनों में जब जब तू आए
जीने की तमन्ना मुझ में भर जाए
 
छाल मेरी तुझ से ऐसी मिल जाए
तेरे मेरे अलग होने का भेद मिट जाए
 
पांवों का चलना उड़ना हो जाए
तन में मेरे जोशीले पंख लग जाए
मन मेरा तेरा सा हो जाए
थके बिना जीवन को आगे बढाए
 
तुझ में बसते जन जन के प्राण
भारत को अपने रखना महान
 
उस्ताद जी माफ करना
कम दूरी की दौड़ में मुझे मत उतारना
 
नहीं जानता आप मेरा क्या हाल करेंगें
जो भी देंगें, आपका प्यार समझ हम ले लेंगें

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