dharma sangrah

कविता : तमन्नाओं पे शर्मिंदा

Updated: मंगलवार, 10 जुलाई 2018 (13:13 IST)
डॉ. रूपेश जैन 'राहत'

अपनी तमन्नाओं पे शर्मिंदा क्यूं हुआ जाए,
एक हम ही नहीं जिनके ख़्वाब टूटे हैं।
 
इस दौर से गुजरे हैं ये जान-ओ-दिल,
संगीन माहौल में जख़्म सम्हाल रखे हैं।
 
नजर उठाई बेचैनी शरमा के मुस्कुरा गई,
ख़्वाब कुछ हसीन दिल से लगा रखे हैं।
 
दियार-ए-सहर1 में दर्द-शनास2 हूं तो क्या,
बेरब्त उम्मीदों में ग़मजदा और भी हैं।
 
अहद-ए-वफा3 करके 'राहत' जुबां चुप है,
वरना आरजुओं के ऐवां4 और भी हैं।
 
शब्दार्थ-
 
1. दियार-ए-सहर- सुबह की दुनिया
2. दर्द-शनास- दर्द समझने वाला 
3. अहद-ए-वफा- प्रेम प्रतिज्ञा
4. ऐवां- महल

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख