मैंने लगाई थी एक अर्जी, धूप के दरबार में, मान ली सूर्य ने, जो भी थी फरियाद वे। कहा मैंने था कि कम है, तेज थोड़ा किरणों में, उर्जारहित होती देह, आ न जाए जीर्णों में। तीव्र मिल गईं किरणें अपार हमें, मैंने लगाई थी एक अर्जी,...