dharma sangrah

हिन्दी कविता : सबेरा हुआ

Updated: गुरुवार, 9 जनवरी 2020 (11:50 IST)
उठो, 
सबेरा हुआ
चांद छुप गया
रंग बदल गया
भानु दस्तक देने लगा
दरवाजे पर
चिड़ियों की चहचाहट
मन गुदगुदाने लगी
बैठी काकी चबूतरे पर
समझाती
कुछ बतियाती 
देखो पेड़ों ने भी
आंखें खोली
अब तो जागो बिटिया
सुबह हुई
नए दिन की शुरुआत हुई। 

लेखक के बारे में
अशोक बाबू माहौर
हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में साहित्य लेखन।.... और पढ़ें

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