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किसे कहें?

Updated: शनिवार, 31 मार्च 2018 (21:19 IST)
वे ले भागे बैंकों का धन। 
जब तक खबर लगी हमको। 
कितने ही कर चुके अतिक्रमण। 
जब तक खबर लगी हमको।। 
 
दुखी अबलाओं ने कर लिया आत्मदहन। 
जब तक खबर लगी हमको। 
व्यापमं से हुए अनगिन फर्जी एडमिशन। 
जब तक खबर लगी हमको।। 
 
बंट गए अपनों को पद्मश्री अलंकरण। 
जब तक खबर लगी हमको। 
पुत्र ने किया वित्तमंत्री की सत्ता का दोहन।
जब तक खबर लगी हमको।। 
 
त्रस्त किसानों के अनगिनत दुखदाई मरण। 
अन्दर तक घुस हो गए आतंकी आक्रमण।
जब तक खबर लगी हमको।। 
 
जाने ऐसी भोर कब आएगी। 
कि घटना के पहले हमें खबर लग जाएगी।। 
लगे हैं हजारों चौकीदार, ऑडिटर, इंस्पेक्टर,
विजीलेंस, जासूस या खुफिया एजेंट। 
अफसोस! न कोई रोक पाया ये काले कारनामे,
सीनाजोरियां, सफेदपोश डाके या कथित एक्सीडेंट।। 
 
सटीक है वह शेर
'यह माना तुम कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन,
खाक़ हो जाएंगे हम तुम को ख़बर होने तक।।'
 
तग़ाफुल = विलम्ब, लापरवाही
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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