क्या ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से हो सकता है brain tumour?
जानिए ब्रेन ट्यूमर से जुड़े क्या हैं मिथ और सच्चाई
Brain Tumor
क्या अत्यधिक फोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर होता है?
दरअसल एक अध्ययन में जानवरों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी का प्रयोग किया गया था। इस प्रयोग में पाया गया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी वेव इतनी ज्यादा स्ट्रोंग नहीं होती है और ना आपका DNA ब्रेक होता है जो कैंसर का कारण बने। दूसरी और कुछ स्टडी के अनुसार ये भी पाया गया है कि रेडियो फ्रीक्वेंसी वेव आपके दिमाग के सेल को कुछ हद तक प्रभावित करती हैं। इस कारण से आपके दिमाग में ब्रेन ट्यूमर का निर्माण हो सकता है। पर इस बात के भी कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि फोन के कारण ब्रेन ट्यूमर का निर्माण होता है।
चलिए जानते हैं ब्रेन ट्यूमर से जुड़े मिथ के बारे में
1. सभी ट्यूमर कैंसर का कारण होते हैं: अधिकतर ब्रेन ट्यूमर नॉन कैंसरस होते हैं। सिर्फ 33% ब्रेन ट्यूमर के केस ही कैंसरस हो सकते हैं।
2. युवाओं में ब्रेन ट्यूमर नहीं होता: आपको बता दें कि ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ केस में नवजात शिशुओं में भी ब्रेन ट्यूमर पाया गया है।
4. सभी ब्रेन ट्यूमर के मरीजों को एक ही लक्षण होते हैं: यह सोचना बिलकुल गलत है कि सभी मरीजों को ब्रेन ट्यूमर के सामान्य लक्षण होते होंगे। आपके शरीर के अनुसार लक्षण भी अलग होते हैं।
5. सिर दर्द और धुंधला दिखना ब्रेन ट्यूमर का कारण है: दरअसल सिर दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं। साथ ही सामान्य बीमारी या आंखों की कमज़ोरी के कारण भी आपको धुंधला दिख सकता है। बिना जांच के ब्रेन ट्यूमर का अंदाजा लगाना उचित नहीं है।

