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गुजरात विधानसभा में UCC बिल पेश : लिव-इन के लिए पंजीकरण अनिवार्य, शादी के 1 साल तक तलाक पर रोक

Updated: गुरुवार, 19 मार्च 2026 (16:15 IST)
गुजरात के सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव लाने के उद्देश्य से आज विधानसभा में 209 पन्नों का 'समान नागरिक संहिता' (UCC) विधेयक पेश किया गया। इस बिल में विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान कानून का प्रावधान है। इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुसूचित जनजाति (ST) समाज को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक पहचान और रीति-रिवाज सुरक्षित रह सकें।
 

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीकरण

नए बिल में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अब से लिव-इन में रहना शुरू करने के 1 महीने के भीतर उसका पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई जोड़ा बिना पंजीकरण के 1 महीने से अधिक समय तक साथ रहता है, तो उन्हें 3 महीने की जेल या 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा गलत जानकारी देकर या धोखाधड़ी से लिव-इन में रहने पर 5 साल तक की जेल का प्रावधान भी किया गया है।
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विवाह और तलाक के नए नियम

विवाह को लेकर बिल में स्पष्ट किया गया है कि शादी के समय पुरुष की आयु 21 वर्ष और महिला की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। विवाह करने वाले दोनों पक्षों में से किसी का भी पिछला जीवनसाथी जीवित नहीं होना चाहिए यानी बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि शादी के 1 साल पूरे होने से पहले कोई भी जोड़ा अदालत में तलाक के लिए अर्जी नहीं दे सकेगा।
 

भरण-पोषण और आर्थिक प्रावधान

तलाक के मामलों में भरण-पोषण (Maintenance) तय करने के लिए अदालत अब दोनों पक्षों की आय के विवरण की जांच करेगी। आवेदक की अपनी आय कितनी है और प्रतिवादी की क्षमता कितनी है, इसे देखकर ही मासिक राशि तय की जाएगी। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि प्रतिवादी को नोटिस मिलने के 60 दिनों के भीतर ही भरण-पोषण की अर्जी का निपटारा करना होगा।
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संपत्ति उत्तराधिकार और वारिसों के अधिकार

पैतृक संपत्ति के बंटवारे में भी समानता लाई गई है। नए नियम के अनुसार, मृतक व्यक्ति के जीवित जीवनसाथी और प्रत्येक संतान को संपत्ति में समान हिस्सा मिलेगा। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस बिल में यह भी प्रावधान है कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी संपत्ति में कानूनी वारिस माना जाएगा, जिससे उसके भविष्य के अधिकार सुरक्षित रहें।
Edited By : Chetan Gour
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