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Last Updated :गांधीनगर , मंगलवार, 10 मार्च 2026 (09:15 IST)

गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के कड़े नियम: 3 टर्म से चुनाव लड़ रहे नेताओं को 'नो टिकट'

bhupendra patel
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) की सरगर्मी शुरू हो गई है, ऐसे में भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए कड़े मापदंड निर्धारित किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जो नेता लगातार 3 टर्म से चुनाव लड़ते आ रहे हैं, उन्हें इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। भाजपा इस नियम के जरिए नए और युवा चेहरों को अवसर देना चाहती है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। इस निर्णय से कई वरिष्ठ नेताओं का पत्ता कटने की पूरी संभावना है।

'एक परिवार, एक पद': परिवारवाद पर भाजपा का कड़ा प्रहार

भाजपा ने इस बार 'एक परिवार, एक पद' का सख्त नियम अपनाने की तैयारी की है। इस नियम के तहत, एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को टिकट या पद नहीं दिया जाएगा। अनौपचारिक रूप से उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिम्मेदार अधिकारियों और संगठन के पदाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

6 महानगर पालिकाओं में 'प्रशासक शासन' की घोषणा

राज्य की 6 प्रमुख महानगर पालिकाओं — अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर और भावनगर — के जनप्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर राज्य सरकार द्वारा प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। नए चुनाव होने और नए बोर्ड के गठन तक, इन शहरों का सारा प्रशासन सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों द्वारा संभाला जाएगा।

वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को सौंपी गई कमान

महानगर पालिकाओं का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य के शीर्ष आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। अहमदाबाद में मुकेश कुमार, वडोदरा में शालिनी अग्रवाल, सूरत में मिलिंद तोरवणे और भावनगर में हर्षद पटेल को प्रशासक नियुक्त किया गया है। इसी तरह राजकोट में रेम्या मोहन और जामनगर में आरती कंवर शहर के प्रशासन की कमान संभालेंगी। ALSO READ: गुजरात में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 6 महानगरपालिकाओं में जन प्रतिनिधियों की विदाई, अब IAS संभालेंगे शहर की कमान

चुनाव में देरी का कारण और आगामी रणनीति

राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया जारी होने के कारण स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर आयोजित नहीं हो सके हैं। हालांकि, भाजपा ने इस समय का उपयोग संगठन को मजबूत करने के लिए किया है। विशेष रूप से विपक्षी दलों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भाजपा 'नो रिपीट थ्योरी' और नए कड़े नियमों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
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