गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के कड़े नियम: 3 टर्म से चुनाव लड़ रहे नेताओं को 'नो टिकट'
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) की सरगर्मी शुरू हो गई है, ऐसे में भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए कड़े मापदंड निर्धारित किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जो नेता लगातार 3 टर्म से चुनाव लड़ते आ रहे हैं, उन्हें इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। भाजपा इस नियम के जरिए नए और युवा चेहरों को अवसर देना चाहती है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। इस निर्णय से कई वरिष्ठ नेताओं का पत्ता कटने की पूरी संभावना है।
'एक परिवार, एक पद': परिवारवाद पर भाजपा का कड़ा प्रहार
भाजपा ने इस बार 'एक परिवार, एक पद' का सख्त नियम अपनाने की तैयारी की है। इस नियम के तहत, एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को टिकट या पद नहीं दिया जाएगा। अनौपचारिक रूप से उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिम्मेदार अधिकारियों और संगठन के पदाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
6 महानगर पालिकाओं में 'प्रशासक शासन' की घोषणा
राज्य की 6 प्रमुख महानगर पालिकाओं — अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर और भावनगर — के जनप्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर राज्य सरकार द्वारा प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। नए चुनाव होने और नए बोर्ड के गठन तक, इन शहरों का सारा प्रशासन सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों द्वारा संभाला जाएगा।
वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को सौंपी गई कमान
चुनाव में देरी का कारण और आगामी रणनीति
राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया जारी होने के कारण स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर आयोजित नहीं हो सके हैं। हालांकि, भाजपा ने इस समय का उपयोग संगठन को मजबूत करने के लिए किया है। विशेष रूप से विपक्षी दलों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भाजपा 'नो रिपीट थ्योरी' और नए कड़े नियमों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
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