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गुड़ी पडवा 2020 : कौन है नए साल का राजा, क्या नाम है संवत्सर का

बुधवार,मार्च 25, 2020
gudi padwa 2020
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प्रतिवर्ष आने वाला यह गुड़ीपड़वा पर्व फिर आया। बधाइयां लाया, पर हम तो वहीं हैं जहां कल खड़े थे। समय बदल गया,कैलेंडर बदल गया, हम नहीं बदले। बधाई दे देना, नव वर्ष शुभ हो कहने भर से खुशियां कभी नहीं बरसतीं। नया बनना होगा, नया भाव जगाना होगा।
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नव संवत्सर के बारे में कई लोग नहीं जानते होंगे। नया वर्ष लगने पर नया संवत्सर भी प्रारंभ होता है। आओ जानते हैं कि संवत्सर किसे कहते हैं।
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नव-संवत्सर हिन्दू नव वर्ष का आरंभ है जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को शक्ति-भक्ति की उपासना, नवरात्रि के साथ प्रारंभ होता है
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'गुड़ी पड़वा' यानी सिर्फ वस्त्रालंकार, गुड़, धनिए, श्रीखंड पुरी का पर्व नहीं वरन विद्या विनय की सीख देने का दिन हैं। तन कर खड़ी 'गुड़ी'स्वाभिमान से जीने और जमीन पर लाठी की तरह गिरते ही साष्टांग नमस्कार कर जिंदगी के उतार-चढ़ाव में बगैर टूटे उठने का ...
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हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं हिन्दी भाषी क्षेत्रों में नवसंवत्सर कहते हैं। हर प्रांत में इसका नाम अलग-अलग है। गुड़ी पड़वा, होला मोहल्ला, युगादि, विशु, वैशाखी, ...
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25 मार्च 2020 नवरात्रि के साथ हिन्दू नववर्ष गुड़ी पड़वा प्रारंभ हो रहा है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इस दिन नीम की पत्तियां, पूरनपोळी, ध्वजा आदि का विशेष महत्व होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि का आरंभ हुआ था और इसी दिन भारतवर्ष में ...
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शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है।
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कैसे करें नवसंवत्सर का पूजन :- इस दिन प्रातः नित्य कर्म कर तेल का उबटन लगाकर स्नान आदि से शुद्ध एवं पवित्र होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर देश काल के उच्चारण के साथ सुख समृद्धि प्राप्त होती है।
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यह सांस्कृतिक सौन्दर्य का पर्व है, इस दिन अपनी संस्कृति को संजोए रखने का शुभ संकल्प लें। सूर्य देव के उच्च होने के साथ ही कोरोना वायरस का खतरा पूरी दुनिया से खत्म हो यही प्रार्थना करें।
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गुड़ी पड़वा के दिन 136 देवों को प्रसन्न किया जा सकता है। शास्त्रों में उनके मंत्र दिए गए हैं। पढ़ें विस्तार से...
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हिंदू संस्कृति के अनुसार नव संवत्सर पर कलश स्थापना कर नौ दिन का व्रत रखकर मां दुर्गा की पूजा प्रारंभ कर नवमीं के दिन हवन कर मां भगवती से सुख-शांति तथा कल्याण की प्रार्थना की जाती है।
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यह उत्सव विशिष्ट ढंग से मनाया जाता है। घर के देवगृह में घर की सर्व सम्पत्ति और शोभायमान चीजों को व्यवस्थित ढंग से रखा जाता है। संवत्सर प्रतिपदा के दिन सुबह उठकर अपनी आँखें खोलकर गृहलक्ष्मी के साथ प्रभु के दर्शन करते हैं। घर का मुख्य व्यक्ति संपत्ति ...
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घर पर स्नान करके संवत्सर की मूर्ति बनाकर उसका 'चैत्राय नमः', 'वसंताय नमः' आदि नाम मंत्रों से पूजन करना चाहिए। इसके बाद पूजन अर्चन करना चाहिए।
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-मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए गुड़ी पड़वा पूजन के साथ 11 कौड़ियों की भी पूजा करें। इन कौड़ियों को पीले रंग के कपडे में बांध कर अपनी तिजोरी में रख दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होगी आपकी तिजोरी हमेशा पैसों से भरी रहेगी।
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जिस दिन से संवत्सर की शुरुआत होती है, वह दिन या दिनाधिपति उस वर्ष का राजा होता है।
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गुड़ी पड़वा के दिन 136 देवों को प्रसन्न किया जा सकता है। शास्त्रों में उनके मंत्र दिए गए हैं। पढ़ें विस्तार से...
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गुड़ी पड़वा हिन्दू नववर्ष के रूप में भारत में मनाया जाता है। इस वर्ष यह 6 अप्रैल 2019 को आ रहा है। इस दिन सूर्य, नीम पत्तियां,अर्घ्य, पूरनपोली, श्रीखंड और ध्वजा पूजन का विशेष महत्व होता है।
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आपको ज्ञात होगा कि देशभर में दशहरे पर रावण दहन होता है। लेकिन उज्जैन संभाग का एक गांव ऐसा है, जहां हिन्दू नववर्ष (गुड़ी पड़वा) और नवरात्रि के प्रथम दिवस की शुरुआत रावण दहन के साथ की जाती है।
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दुनियाभर के हजारों तरह के कैलेंडर प्रचलित है। संभवत: हर माह एक नया वर्ष प्रारंभ होता होगा। कोई चंद्र पर आधारित है, कोई सूर्य पर तो कोई कैलेंडर दिन-रात पर आधारित है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा कौन सा कैलेंडर है जो कि विज्ञान सम्मत है। यदि विज्ञान ...
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