पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल : क्या कहती है धरती हमारी

सूरज के चारों ओर चक्कर लगाने में मुझे 365-1/4 दिन लगते हैं। यह संख्या पूर्णांक में न होने के कारण 1 वर्ष की अ‍वधि 365 दिन 3 वर्ष तक रहती है। चौथा वर्ष 366 दिन का होता है, क्योंकि चौथे वर्ष फरवरी माह 28 दिन का न होकर 29 दिन का होता है।
अपनी मानचित्रावली में मेरे गोल चित्र में कुछ रेखाएं दिखाई जाती हैं, वे वास्तविक नहीं हैं। स्थान, क्षेत्र और समय की जानकारी के लिए इनको मान लिया गया है। उन्हें अक्षांश और देशांतर रेखाएं कहते हैं। उत्तर से दक्षिण ध्रुवों को मिलाती खड़ी रेखाएं देशांतर कहलाती हैं जिनकी कुल संख्या 360 है। जो आड़ी रेखाएं पूर्व से पश्चिम की ओर खिंची रहती हैं, वे अक्षांश कहलाती हैं। इनकी कुल संख्या 90 उत्तर तथा 90 दक्षिण मिलाकर 180 है। इन रेखाओं द्वारा ही तुम लोग अपनी स्थिति और समय आदि को जान पाते हो।
मैं अपने जन्म से लगातार घूमती कैसे रहती हूं? यह बात बता दूं। मेरे जैसे प्रत्येक आकाशीय पिंड में 3 शक्तियां होती हैं। एक आकर्षण शक्ति, दूसरी अपकेंद्रीय बल और तीसरी जड़त्व का सिद्धांत। इसमें आकर्षण शक्ति और बाहर जाने की शक्ति (घूमने के कारण) उपकेंद्रीय बल से हम लोग अपने-अपने स्थान पर टिके हुए हैं और गति जड़त्व के आधार पर निरंतर बनी हुई है।

जिस प्रकार क्रिकेट की गेंद फेंकने वाला गेंद को अपनी अंगुलियों से स्पिन (घुमा) कर देता है उसी के अनुसार गेंद आखिर तक घूमती जाती है। उसी प्रकार हमारे में लगातार आरंभ में घूमने के कारण गति बनी हुई है।
चलते-चलते एक बात और बता दूं। हम (ग्रह) जिस तारे (सूर्य) के चारों ओर चक्कर लगाते हैं उसमें तो प्रकाश और गर्मी होती है, परंतु आकाश में हम दूर से चमकते तो जरूर हैं, लेकिन सूर्य की तरह दूसरों को प्रकाशित नहीं कर सकते और हमारा चंद्रमा (उपग्रह) न चमकता है और न दूसरों को प्रकाशित ही कर पाता है। हमारा चन्द्रमा तो सूरज के प्रकाश से प्रकाशित होकर ही चमक पाता है और इसके प्रकाश को ही परावर्तित कर पाता है।
अब जरा ग्लोब उठाकर देखो। तुम्हें इस पर पूर्व से पश्चिम की खिंची हुई कुछ रेखाएं दिखाई देंगी। उनमें कर्क रेखा, मकर रेखा, उत्तरी ध्रुव वृत्त एवं दक्षिणी ध्रुव वृत्त विशेष रूप से प्रदर्शित रहते हैं। इन रेखाओं का निर्धारण सूर्य की स्थिति के आधार पर किया गया है। कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में 23-1/2 अक्षांश पर इसलिए है‍ कि सूर्य की लंबवत किरणें इसी सीमा तक पड़ती हैं, इसके आगे सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं।

दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा भी इसी प्रकार 23-1/2 अक्षांश पर निर्धारित की गई है। दोनों गोलार्धों में ध्रुव व्रत 66-1/2 अंश पर ही निर्धा‍रित है, जहां तक दिन और रात की लंबाई 24 घंटे तक हो जाती है। इससे आगे दिन की लंबाई बढ़ती जाती है, जो ध्रुवों पर जाकर 6 महीने के दिन अथवा 6 महीने की रात के रूप में होती है।

साभार- देवपुत्र


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