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Gangaur: गणगौर तीज, जानिए पर्व का महत्व और पूजा विधि

Written By WD Feature Desk
Updated: सोमवार, 31 मार्च 2025 (08:58 IST)
Gangaur 2025: हिंदी पंचांग कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर पूजा पर्व मनाया जाता है। गणगौर पूजा को गौरी तीज या गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। गणगौर एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है, जो विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में मनाया जाता है। यह त्योहार देवी पार्वती (गौरी) को समर्पित त्योहार है।ALSO READ: होलिका दहन और धुलेंडी के अलग अलग हैं रिवाज, जानकर करेंगे आश्चर्य

आइए जानते हैं वर्ष 2025 में गणगौर पर्व कब मनाया जा रहा है... 
 
गणगौर का महत्व: गणगौर का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है। गणगौर एक रंगीन और जीवंत त्योहार है जो हिंदू संस्कृति में महिलाओं के महत्व को दर्शाता है। गणगौर का त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। वे अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए देवी पार्वती की पूजा करती हैं। साथ ही इस दिन अविवाहित लड़कियां भी अच्छे पति की कामना के लिए इस त्योहार को मनाती हैं।
 
गणगौर 2025 में कब है : प्रतिवर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर पूजा मनाई जाती है। इस बार गणगौर का पर्व 31 मार्च, सोमवार को मनाया जाएगा। दिल्ली समयानुसार तृतीया तिथि 31 मार्च 2025 को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और 01 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, इस बार गणगौर व्रत 31 मार्च को रखा जाएगा।ALSO READ: चैत्र नवरात्रि कैसे है शारदीय नवरात्रि से अलग, जानिए 7 अंतर
 
गणगौर की परंपराएं:
• इस दिन महिलाएं देवी पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाती हैं और उन्हें सजाती हैं।
• वे पारंपरिक गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं।
• वे देवी पार्वती को विशेष प्रकार के भोजन का भोग लगाती हैं।
• गणगौर के जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें महिलाएं देवी पार्वती की मूर्तियों को लेकर जाती हैं।
 
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