गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को आठवें दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं
ganesh jee ka aaj ka bhog: इस बार गणेश उत्सव का पर्व 10 नहीं बल्कि 12 दिनों का है। इन 12 दिनों में गणेश जो को प्रत्येक दिन अलग अलग भोग और प्रसाद अर्पित करते हैं। गणेश चतुर्थी उत्सव के आठवें 8वें दिन गणपति जी को रवे से बने मोदक का भोग लगाया जाता है। इस दौरान भगवान श्रीगणेश की पूजा मध्यान्हकाल, अभिजीत मुहूर्त और प्रदोषकाल में की जाती है।
आठवां दिन- रवा मोदक:
रवा मोदक, पारंपरिक चावल के आटे वाले मोदक की तुलना में बनाने में थोड़े आसान और खाने में बहुत स्वादिष्ट होते हैं। ये अंदर से मीठे और बाहर से कुरकुरे होते हैं, जो इन्हें एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं। यहां गणेश उत्सव के अवसर पर रवा मोदक बनाने की एक सरल और पारंपरिक विधि दी गई है।
आठवें दिन के मुख्य प्रसाद/भोग विकल्प
गणेश उत्सव के आठवें दिन गणपति बाप्पा को मखाने की खीर या मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
मखाने और मेवे की खीर: गाय के शुद्ध दूध में मखाने, काजू, बादाम, केसर और इलायची मिलाकर यह खीर तैयार की जाती है। आठवें दिन बप्पा को खीर का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
मोतीचूर या बेसन के लड्डू: गणेश जी को लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। आठवें दिन उन्हें शुद्ध देशी घी में बने मोतीचूर या बेसन के लड्डू अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
नारियल/केसर मोदक: यदि आप मोदक चढ़ा रहे हैं, तो आठवें दिन ताजे कद्दूकस किए हुए नारियल, गुड़ और केसर से बने उकडीचे मोदक या मावा-केसर मोदक का भोग लगाएं।
भोग अर्पित करने के नियम
दूर्वा जरूर रखें: बाप्पा को भोग लगाते समय प्रसाद की थाली में 21 या कम से कम एक जोड़ा दूर्वा (दूब घास) अवश्य रखें।
तुलसी न चढ़ाएं: गणेश जी की पूजा और उनके प्रसाद में तुलसी के पत्तों का प्रयोग भूलकर भी न करें।
अर्पण मंत्र: भोग अर्पित करते समय "ॐ गं गणपतये नमः" या "श्री गणेशाय नमः" मंत्र का जाप करें और जल का आचमन कराएं।

