मेरठ में महापंचायत में गरजे CM केजरीवाल, बोले- 70 साल से सभी पार्टियां किसानों को दे रहीं धोखा

हिमा अग्रवाल| पुनः संशोधित रविवार, 28 फ़रवरी 2021 (21:37 IST)
मेरठ। नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन पर वोटों को सेंकने के लिए सभी विपक्षी दलों ने ताल ठोक रखी है। आज आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी में कर ताल ठोकते हुए कहा कि 70 साल में देश के किसान ने धोखा देखा है।
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उन्होंने 70 साल यानी आजादी के बाद सत्ता में रहीं सरकारों को लपेटते हुए कहा कि किसान 70 साल से फसल का सही दाम मांग रहा है और सारी पार्टियों के घोषणा पत्र में लिखा है कि हम फसलों के सही दाम देंगे लेकिन किसी ने किसानों को उपज का उचित मूल्य नहीं दिया, अगर सही दाम मिलते तो किसान आत्महत्या नहीं करता। उन्होंने कहा कि 25 साल में साढ़े तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन अब किसानों के लिए जिंदगी और मौत की लड़ाई है क्योंकि किसानों के लिए नए डेथ वारंट हैं।

भाजपा सरकार पर केजरीवाल ने सीधे तीर चलाए। अपने उद्बोधन में वे बोले कि नए कानूनों के क्रियान्वयन होते ही किसान अपने खेत में ही मज़दूर बन जाएगा। 2014 के चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने किसानों की पीठ में छूरा घोंपा है। आप सुप्रीमो यहीं नहीं रुके बल्कि वर्तमान केंद्र सरकार की तुलना अंग्रेजी हुकूमत से करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भी इतने ज़ुल्म नहीं किए थे और कीलें ठोकने का काम अंग्रेजों ने भी नहीं किया था।
पश्चिमी उत्तरप्रदेश में अपनी पार्टी की जमीन तैयार करने आए केजरीवाल ने अपना उद्बोधन मेरठ में भारत माता के जयकारे के साथ शुरू किया और साथ ही इंकलाब जिंदाबाद और वंदेमातरम का उद्घोष कर अपना दुःख प्रकट करते हुए बोला कि आज देश का किसान पीड़ा में है दुखी है।
95 दिनों से ठंड में दिल्ली बॉर्डर में किसान धरने पर बैठे हैं। 250 से ज्यादा किसान शहीद हुए हैं और फिर सीधे लालकिले पर घटित निंदनीय घटना के लिए सीधे तौर पर वर्तमान सरकार पर ही आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि लालकिले का पूरा कांड इन्होंने खुद कराया।

किसानों की नब्ज पर हाथ रखते हुए केजरीवाल दहाड़े : हमारा किसान देशद्रोही नहीं हो सकता
आप सुप्रीमो बोले कि अंग्रेजों ने हमारे किसानों पर देशद्रोह के मुकदमे दर्ज किए थे लेकिन मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या तुम सारे आतंकवादी हो। अरविंद केजरीवाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हमने कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में हिस्सा लिया है जबकि केंद्र सरकार ने दिल्ली के 9 स्टेडियम को जेल बनाने की बात कही लेकिन जेल बनाने की पावर मेरे पास है।

केंद्र सरकार ने जेल बनाने के लिए धमकी दी हमने फ़ाइल क्लियर नहीं की। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस को लपेटते हुए कहा कि अन्ना आंदोलन के समय भी कांग्रेस ने स्टेडियम को जेल बनाया था, लेकिन आप किसानों की तन-मन-धन से सेवा कर रहे हैं। हमने पानी, टॉयलेट, फ्री वाईफाई की व्यवस्था की।
केजरीवाल बोले कि 28 जनवरी को जो टीवी में देखा यकीन नहीं हुआ। राकेश टिकैत किसानों के लिए शरीर गला रहे थे लेकिन टिकैत की आंखों में आंसू नहीं देखे गए। यूपी की एक मंडी बता दो जिस पर एमएससी पर धान या कोई फसल उठता हो लेकिन ये लोग सुबह-शाम झूठ बोलते हैं। इसके साथ ही किसानों को लुभाने के लिए उन्होंने कहा कि मैंने राकेश से कहा हम हैं आपके साथ।

केजरीवाल ने दावा किया कि एक नया पैसा खर्च किए बिना 23 फसलें एएसपी पर सरकार उठा सकती है। उन्होंने आंकड़ों को भाषण में पिरोकर बताया कि केंद्र सरकार को हमारे फॉर्मूले से कोई घाटा नहीं होगा। इसके बाद उत्तरप्रदेश सरकार और चीनी मिलें उनके निशाने पर आ गईं।

उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में गन्ना किसानों को पैसा नहीं मिलता और गन्ना मूल्य के 18000 करोड़ रुपया मिल मालिक लेकर बैठे हैं। वे बोले कि योगीजी की क्या मजबूरी है कि मिल मालिक ठीक नहीं हो सकते। इसी के साथ उन्होंने दिल्ली सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
केजरीवाल ने कहा कि बिजली कंपनियों को मैंने दिल्ली में ठीक कर दिया। दिल्ली में 24 घंटे बिजली आती है बिल जीरो आता है जबकि चीनी की कंपनियां तो छोटी-छोटी हैं। सरकार चीनी मिल मालिकों के सामने घुटने टेक कर बैठी है। आप पार्टी के मुखिया बोले- योगी सरकार पर लानत है।

उन्होंने कहा कि नीयत वाली सरकार आ गई गन्ना छोड़ने के बाद घर पंहुचने के पहले पैसे आ जाएंगे लेकिन अच्छी नीयत की सरकार लाओ। गैस-पेट्रोल के दाम कम हो जाएंगे। अपनी उपलब्धियों को उन्होंने बार-बार गिनाया। इसी क्रम में वे बोले- दिल्ली के अंदर 75 प्रतिशत जनता की बिजली मुफ्त है और आप पार्टी की सरकार आई तो यूपी में घर की बिजली भी मुफ्त होगी।
अंत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की क्या मजबूरी है, लोग कह रहे हैं कि बयाना ले रखा है। केजरीवाल बोले कि जो भारत से प्यार करता है वह इस आंदोलन के खिलाफ नहीं हो सकता, इसलिए मेरा फ़र्ज़ बनता है कि आपका बेटा आंदोलन में शामिल रहे।



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