होलकर शासकों के दीवान- पलशीकर बंधु

इंदौर नगर के लिए का नाम नया नहीं है। इस परिवार के संस्थापक रामजी यादव थे। उल्लेखनीय है कि जब मालवा क्षेत्र में सूबेदार को सत्ता सौंपी गई तभी पेशवा बालाजी बाजीराव द्वारा रामजी यादव को मल्हारराव होलकर का 'कारभारी' नियुक्त किया गया था। पानीपत के तृतीय युद्ध (1761 ई.) में मल्हारराव के साथ रामजी यादव के पुत्र आनंदराव रामजी भी गए थे। आनंदराव वहीं खेत रहे। उनके स्थान पर अप्पाजी रामजी ने कार्यभार ग्रहण किया। अप्पाजी की मृत्यु के बाद रामराव अप्पाजी ने उक्त दायित्व का निर्वाह किया।

हरिराव होलकर के शासनकाल के प्रारंभ में ही रामराव अप्पाजी का देहावसान हो गया। उनके देहांत के बाद नारायणराव रामजी हरिराव के दीवान नियुक्त हुए। इनके बाद महाराजा तुकोजीराव द्वितीय के समय में इसी परिवार के रामराव नारायण को दीवान बनाया गया। महाराजा की अल्प वयस्कता की अवधि में दीवान के दायित्व काफी बढ़ गए थे। इंदौर रेसीडेंसी के माध्यम से आने वाले ब्रिटिश दबाव का भी उसे सामना करना था। दीवान ने अपने दायित्वों का निर्वाह बखूबी किया। इन सेवाओं से प्रसन्न होकर महारानी भागीरथीबाई साहेबा ने 28 मार्च 1884 कोदीवान रामराव को भूमि की 'सनद' प्रदान कर सम्मानित किया।
महाराजा तुकोजीराव (द्वितीय) ने रामराव दीवान को अजंदा नामक गांव जागीर में प्रदान किया था। इसके अतिरिक्त इस परिवार को 6000 रु. नकद की राशि प्रतिवर्ष प्रदान की जाती थी। पेशवा बालाजी बाजीराव और पेशवा माधवराव भी इस परिवार द्वारा मराठा राज्य के प्रति की गई सेवाओं से बहुत प्रभावित व प्रसन्न थे। इस परिवार को दक्षिण में 5 गांवों की जागीर प्राप्त थी जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 15,000 रु. की आय पलशीकर परिवार को हासिल होती थी। होलकरों की सेवा में आ जाने के बाद भी यह जागीर यथावत बनी रही। महाराजा तुकोजीराव (द्वितीय) के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था व लगान वसूली के क्षेत्र में पलशीकर दीवान ने उपयोगी योजनाओं को लागू कर राजकीय राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की थी। नगर के उल्लेखनीय पुराने घरानों में पलशीकर परिवार विशिष्ट महत्व रखता है।



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