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Nirjala Ekadashi 2021: कब है निर्जला एकादशी का कठिन व्रत, जानें 10 प्रमुख बातें

गुरुवार,जून 17, 2021
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इस वर्ष 6 जून 2021, रविवार को अचला (अपरा) एकादशी पर्व मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं ‘अचला’ या 'अपरा' एकादशी पापरूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी है।
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ज्येष्ठ महीने की शुरुआत 27 मई 2021 से हो गई है। ज्येष्ठ के महीने में 6 जून, रविवार को अचला (अपरा एकादशी) मनाई जाएगी। ज्येष्ठ का यह महीना 25 जून 2021 तक जारी रहेगा। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि को अपरा एकादशी पर्व मनाया जाएगा। मान्यता ...
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ज्येष्ठ माह में अपरा और निर्जला एकादशी आती है। अपरा एकादशी को अचला या अजला एकादशी भी कहते हैं। इस पर यह एकादशी का व्रत 6 जून 2021 रविवार को रखा जाएगा। इस एकादशी के दिन भगवान त्रिविक्रम यानि भगवान विष्णु की तुलसी, चंदन, कपूर व गंगाजल से पूजा करनी ...
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27 मई 2021 से ज्येष्ठ महीने की शुरुआत हो गई है। ज्येष्ठ का यह महीना 25 जून 2021 तक जारी रहेगा। ज्येष्ठ के महीने में 6 जून, रविवार को अचला (अपरा एकादशी) मनाई जाएगी।
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रविवार, 23 मई 2021 को मोहिनी एकादशी है। यह एकादशी वैशाख शुक्ल ग्यारस के दिन मनाई जाती है। मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना करने से जहां सुख-समृद्धि बढ़ती है
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धार्मिक ग्रंथों में मोहिनी एकादशी की तिथि अत्यंत शुद्ध तथा पवित्र मानी गई है। इस एकादशी के दिन व्रत-उपवास रखने से यह पूरे वैशाख मास के दान का पुण्य देती है। यहां पढ़ें पौराणिक एवं प्रामाणिक व्रत कथा-
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं। वैशाख में वरुथिनी और मोहिनी एकादशी ...
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रविवार, 23 मई 2021 को मोहिनी एकादशी है। यह एकादशी वैशाख शुक्ल ग्यारस के दिन मनाई जाती है। मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना
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माह में 2 एकादशियां होती हैं और वर्ष में 365 दिनों में मात्र 24 एकादशियां होती हैं। प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं। शास्त्र में प्रत्येक एकादशी व्रत का नाम और फल अलग-अलग बताया गया है। 7 मई 2021 को वरुथिनी ...
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वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम वरुथिनी एकादशी है। इस वर्ष 7 मई 2021, शुक्रवार को यह एकादशी मनाई जा रही है।
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हमारे सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रानुसार हर हिन्दू धर्मावलंबी के लिए एकादशी व्रत रखना श्रेयस्कर माना गया है वहीं वैष्णवों के लिए तो एकादशी व्रत अनिवार्य बताया गया है।
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अगर प्रतिदिन कोई मंत्र न पढ़ सकें तो कम से कम किसी खास अवसर पर या जैसे एकादशी या गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का स्मरण कर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना
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हिन्दू नववर्ष की पहली एकादशी इस बार शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021 को मनाई जा रही है। चैत्र शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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व्यक्ति निरोगी रहता है, राक्षस, भूत-पिशाच आदि योनि से छुटकारा मिलता है, पापों का नाश होता है, संकटों से मुक्ति मिलती है, सर्वकार्य सिद्ध होते हैं, सौभाग्य प्राप्त होता है, मोक्ष मिलता है,
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शास्त्रों को पढ़ने के बाद पता चलता है कि ऐसे व्रत कुल 26 होते हैं जिन्हें 'एकादशी' कहा गया है। एकादशी की ये 15 बातें आपको जरूर जानना चाहिए। आइए जानें
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पापमोचिनी एकादशी होली और नवरात्रि के मध्य आती है और इस बार पापमोचिनी एकादशी 07 अप्रैल, दिन बुधवार को है। पापमोचिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
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धर्मराज युधिष्‍ठिर बोले- हे जनार्दन! चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मुझे बताइए। श्री भगवान बोले, हे राजन्-
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चैत्र माह में कामदा और पापमोचिनी एकादशी आती है। कामदा से राक्षस आदि की योनि से छुटकारा मिलता है और यह सर्वकार्य सिद्धि करती है। इस साल पापमोचिनी एकादशी 07 अप्रैल 2021 दिन बुधवार को है। आओ जानते हैं पापमोचिनी एकादशी व्रत के बारे में। चैत्र माह में ...
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एक वैदिश नाम का नगर था जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्ण आनंद सहित रहते थे। उस नगर में सदैव वेद ध्वनि गूंजा करती थी तथा पापी, दुराचारी
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