षटतिला एकादशी के 11 नियम, व्रत से पहले जान लीजिए

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पुनः संशोधित गुरुवार, 27 जनवरी 2022 (10:52 IST)
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Shattila Ekadashi 2022: 28 जनवरी 2022 शुक्रवार को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। षटतिला एकादशी माघ माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारस को रहती है। षटतिला का अर्थ होता है 6 तिल। इस एकादशी में तिल को 6 तरह से उपयोग में लिया जाता है। आओ जानते हैं एकादशी के व्रत रखने के 11 खास नियम।


1. दसमी के दिन से ही षटतिला एकादशी का व्रत प्रारंभ हो जाता है, जो पारण के समय तक जारी रहता है।

2. स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्त होकर सब देवताओं के देव श्री भगवान का पूजन करें और एकादशी व्रत धारण करें।

3. इस व्रत में रात्रि को जागरण करना चाहिए। इंद्रियों को वश में करके काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या तथा द्वेष आदि का त्याग कर भगवान का स्मरण करना चाहिए।

4. इस दिन किसी भी रूप में चावल ग्रहण नहीं किया जाता है।

5. इस दिन 1. तिल स्नान, 2. तिल का उबटन, 3. तिल का हवन, 4. तिल का तर्पण, 5 तिल का भोजन और 6. तिलों का दान- ये तिल के 6 प्रकार हैं। इनके प्रयोग के कारण यह षट्तिला एकादशी कहलाती है तथा इसका बहुत पुण्य प्राप्त होता है।

6. एकादशी के दिन तुलसी को जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही उसे छूना चाहिए।
7. इस दिन प्याज, लहसुन, मसूर की दाल, गाजर, शलजम, गोभी, पालक आदि का भी सेवन नहीं करते हैं।

8. इस दिन झाडू और पोछा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की हत्या का दोष लगता है।

9. इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए।

10. इस दिन लकड़ी का दातुन न करें। नींबू, आम या जामुन के पत्ते चबाकर कुल्ला कर लें और अंगुली से गला साफ कर लें।

11. इस दिन ब्रह्मचर्य का पूर्णत: पालन करें।



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