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Ekadashi vrat rules: एकादशी का व्रत यदि इस तरह रखते हैं तो नहीं मिलेगा फायदा

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 27 जनवरी 2026 (18:03 IST)
एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है, लेकिन अक्सर लोग अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत को करने के कुछ खास नियम जानना जरूरी है। अक्सर करते हैं लोग एकादशी व्रत में ये 7 गलतियां।
 
  1. प्रारंभ संकल्प (व्रत प्रारंभ करने का संकल्प):-
  2. पारण (व्रत खोलने) का गलत समय:-
  3. चावल का सेवन (दशमी से द्वादशी तक):-
  4. एकादशी में रखते हैं निर्जला उपवास:- 
  5. तुलसी दल तोड़ने की गलती:-
  6. एकादशी व्रत में मानसिक शुद्धता:-
  7. एकादशी व्रत रखें ये सावधानी, तामसिक भोजन और नशा:-
 

1. प्रारंभ संकल्प (व्रत प्रारंभ करने का संकल्प):- 

एकादशी का व्रत तिथि विशेष के प्रारंभ होने के पूर्व से ही किया जाता है। अक्सर लोग इस बात को भूल जाते हैं। कई लोग उदयातिथि से भी यह व्रत रखते हैं तब भी इसमें तिथि प्रारंभ का समय जानना जरूरी है।
 

2. पारण (व्रत खोलने) का गलत समय:-

एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन तिथि के समाप्त होने के बाद किया जाता है। कई लोग दिन में उपवास करके रात्रि में भोजन कर लेते हैं जो कि पूर्ण व्रत नहीं माना जाता है। एकादशी के व्रत का फल तब तक पूरा नहीं मिलता जब तक उसका पारण सही समय पर न किया जाए। द्वादशी तिथि के भीतर और 'हरि वासर' (द्वादशी का पहला चौथाई हिस्सा) समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए। यदि आप पारण में देरी करते हैं या बहुत जल्दी खोल देते हैं, तो व्रत खंडित माना जाता है।
 

3. चावल का सेवन (दशमी से द्वादशी तक):-

एकादशी के दिन चावल खाना निषेध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन चावल में 'महर्षि मेधा' का अंश माना जाता है। न केवल एकादशी के दिन, बल्कि दशमी (व्रत से एक दिन पहले) की रात को भी चावल खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका अंश अगले दिन शरीर में रह सकता है।
 

4. एकादशी में रखते हैं निर्जला उपवास:- 

एकादशी का व्रत निर्जला रखा जाता है। इसके पीछे कई तरह के कारण हैं। एकादशी को माता तुलसी भी निर्जला उपवास करती हैं। निर्जल उपावास से ही व्रत का सही फल मिलता है।
 

5. तुलसी दल तोड़ने की गलती:-

भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है और उनके भोग में तुलसी का होना अनिवार्य है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। भोग के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले (दशमी को) ही तोड़कर रख लेने चाहिए। इस दिन तुलसी में जल चढ़ाना भी वर्जित माना जाता है ताकि उनके ध्यान में विघ्न न पड़े।
 

6. एकादशी व्रत में मानसिक शुद्धता:-

एकादशी के दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता जरूरी है। एकादशी को "इंद्रियों पर नियंत्रण" का पर्व माना जाता है। यदि आप व्रत रख रहे हैं लेकिन किसी की बुराई या चुगली कर रहे हैं, गुस्सा या अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं या मन में द्वेष भाव रख रहे हैं तो उपवास मात्र एक "डाइट" बनकर रह जाता है, "व्रत" नहीं।
 

7. एकादशी व्रत रखें ये सावधानी, तामसिक भोजन और नशा:-

व्रत के दौरान या व्रत से एक दिन पहले लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। यदि घर में कोई अन्य सदस्य भी एकादशी के दिन तामसिक भोजन बनाता है, तो उसका प्रभाव व्रत की ऊर्जा पर पड़ता है।
 

एकादशी व्रत में क्या करें?

 

एकादशी व्रत में क्या न करें?


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