सम्बंधित जानकारी
- कामदा एकादशी: साधना, पुण्य और दिव्य आशीर्वाद की कथा
- कामदा एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं, क्या है पारण का समय और महत्व
- कामदा एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
- साल 2025 में कब-कब पड़ेगी एकादशी तिथि, जानें पूरे साल की लिस्ट
- श्री महावीर जी: भगवान महावीर के अतिशय क्षेत्र की आध्यात्मिक यात्रा
कामदा एकादशी व्रत का पारण कब होगा?
Kamada Ekadashi 2025 : हिन्दू पंचांग कैलेंडर के अनुसार आज 8 अप्रैल 2025, मंगलवार को कामदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है, इसलिए इसका पारण यानी व्रत तोड़ने का समय अगले दिन, यानी 9 अप्रैल 2025, बुधवार को संपन्न होगा। ALSO READ: कामदा एकादशी: साधना, पुण्य और दिव्य आशीर्वाद की कथा
आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कामदा एकादशी व्रत पारण के टाइमिंग के बारे में...
यहां जानते हैं पारण का शुभ मुहूर्त: अधिकांश धार्मिक पंचांगों के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत का पारण 9 अप्रैल 2025 को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश आप सुबह पारण नहीं कर पाते हैं, तो द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लें।
बता दें कि पारण तिथि पर 09 अप्रैल को दोपहर 10 बजकर 55 मिनट पर द्वादशी का समापन होगा। इसलिए, आप कल, 9 अप्रैल, 2025 को सुबह 06:02 से 08:34 बजे के बीच कामदा एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं।
व्रत खोलने की विधि/ पारण विधि:ALSO READ: कामदा एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, जानें मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
1. कामदा एकादशी व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर उनकी पूजा करें। उन्हें फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
3. भगवान विष्णु की आरती करें।
4. भगवान विष्णु को अर्पित तुलसी के पत्ते को ग्रहण करें।
5. यदि संभव हो तो किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
6. इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करके अपना व्रत तोड़ें। एकादशी के व्रत के पारण में चावल का सेवन करना शुभ माना जाता है।
व्रत खोलने संबंधी महत्वपूर्ण बातें:
• पारण हमेशा द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करना चाहिए।
• हरि वासर के दौरान पारण नहीं करना चाहिए। हरि वासर एकादशी तिथि समाप्त होने के बाद का कुछ समय होता है, जिसे अशुभ माना जाता है। हालांकि, इस एकादशी के लिए हरि वासर का समय पारण के समय के भीतर नहीं आ रहा है।
• यदि किसी कारणवश आप सुबह पारण नहीं कर पाते हैं, तो द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले कर लें।
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: कामदा एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं, क्या है पारण का समय और महत्व