मौत के तरीके बदलते रहे। ट्रैक्टर, ट्रक, डंपर और गोलियां... लेकिन कानून को चुनौती देने का दुस्साहस नहीं बदला।
जिस प्रदेश में अपराधी पुलिस से नहीं डरता, वहां आम नागरिक किससे सुरक्षा की उम्मीद करेगा?
अपराधी को यह भरोसा नहीं होना चाहिए कि सत्ता उसके पीछे है। उसे यह भरोसा होना चाहिए कि कानून उसके सामने है।