दानवी वृत्तियों का नाश करें

युग बदल चुका है। वह त्रेता था, यह कलयुग है। रावण असुर था, उसकी वृत्तियाँ भी असुरी थीं लेकिन उसने भी अपने जमीर से गिरकर कोई कार्य नहीं किया। आज का मानव तो दानव नहीं है लेकिन उसकी वृत्तियाँ दानवी हैं। हम दिशाहीन हो रहे हैं। दशहरा मना लेने भर से असत्यपर सत्य की विजय नहीं होती। कर्मों में आदर्श और मर्यादाएँ लाने से असत्य पर सत्य की विजय होती है। अतः विजय पर्व पर मानवता को सशक्त करने का प्रयास करें।



और भी पढ़ें :