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Diwali 2025: क्या होते हैं ग्रीन पटाखे? पर्यावरण की दृष्टि से समझिए कैसे सामान्य पटाखों से हैं अलग

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 (11:38 IST)
Green crackers vs normal crackers: दिवाली के आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का मुद्दा गर्मा जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस बार एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए दिल्ली-एनसीआर में 18 से 21 अक्टूबर के बीच ग्रीन पटाखों को जलाने की सशर्त अनुमति दे दी है। यह फैसला एक ओर त्योहार की खुशी को बरकरार रखता है, तो दूसरी ओर पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है। लेकिन, ये ग्रीन पटाखे आखिर हैं क्या, और ये पारंपरिक पटाखों से कैसे अलग हैं? आइए, तथ्यों के साथ समझते हैं।

कैसे सामान्य पटाखों से हैं अलग: आमतौर पर पारंपरिक पटाखों में तेज रोशनी, ज़ोरदार आवाज़ और आकर्षक रंगत के लिए कई खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है। इनमें मुख्य रूप से सल्फर, नाइट्रेट, एल्युमीनियम पाउडर और बेरियम जैसे तत्व शामिल होते हैं। जब ये पटाखे जलाए जाते हैं, तो ये भारी मात्रा में धुआं और हानिकारक गैसें जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड छोड़ते हैं, साथ ही पार्टिकुलेट मैटर (PM) को भी बढ़ाते हैं। दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर में होने वाली अचानक और तीव्र वृद्धि इसका सीधा प्रमाण होती है, जो श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है।

क्या हैं ग्रीन पटाखे: इन गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य खतरों के विकल्प के रूप में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) - नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने ग्रीन पटाखों को विकसित किया है। इन पटाखों को तैयार ही इस तरह से किया गया है कि ये पर्यावरण के लिए काफी हद तक सुरक्षित हों। ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से इसलिए अलग हैं क्योंकि:
कम हानिकारक रसायन: इनमें बेरियम नाइट्रेट जैसे अत्यधिक जहरीले रसायनों का उपयोग या तो बहुत कम किया जाता है, या बिल्कुल नहीं किया जाता।
कम उत्सर्जन: NEERI के अनुसार, ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30% से 40% तक कम हानिकारक गैसें और पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्पन्न करते हैं। कुछ ग्रीन पटाखे तो धूल को सोखने वाली पानी की बूंदें भी छोड़ते हैं।
सीमित ध्वनि स्तर: जहां सामान्य पटाखे 160 डेसीबल तक शोर कर सकते हैं, वहीं ग्रीन पटाखों की आवाज़ 110 से 125 डेसीबल तक ही सीमित होती है।
तीखी गंध की अनुपस्थिति: असली ग्रीन पटाखे जलाने पर न तो तीखी गंध उठती है और न ही आंखों में जलन होती है, जबकि सामान्य पटाखों से तुरंत दम घोंटू धुआं निकलता है।

कैसे करें ग्रीन पटाखों की पहचान: बाजार में नकली ग्रीन पटाखों की बिक्री को रोकने के लिए, NEERI ने एक महत्वपूर्ण उपाय किया है। असली ग्रीन पटाखों की पहचान करने के लिए हर पटाखे के पैकेट पर एक यूनिक QR कोड और हरा 'CSIR-NEERI' लोगो होना अनिवार्य है।
1. QR कोड स्कैन करें: अपने मोबाइल कैमरा या विशेष ऐप (CSIR NEERI ग्रीन क्यूआर कोड ऐप) से पैकेट पर दिए गए QR कोड को स्कैन करें।
2. जानकारी का सत्यापन: स्कैन करने पर, आपको निर्माता का नाम, लाइसेंस नंबर, पटाखे का प्रकार और उसके रासायनिक संघटन सहित अन्य ज़रूरी जानकारियां मिलेंगी।
3. सत्यता की पुष्टि: यदि QR कोड स्कैन करने पर ग्रीन पटाखे से जुड़ी प्रमाणित जानकारी नहीं मिलती है, तो इसका मतलब है कि वह पटाखा नकली है और उसे नहीं खरीदना चाहिए।

 
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