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केक लवर्स सावधान! केक से हो सकता है कैंसर, रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Written By WD Feature Desk
Updated: शनिवार, 1 मार्च 2025 (14:46 IST)
Cancer-causing agents in cakes: केक एक ऐसा व्यंजन है जो भारतीय ना होकर भी भारत में बहुत लोकप्रिय है। जन्मदिन पर तो केक काटने की रस्म के बिना सेलिब्रेशन पूरा माना ही नहीं जाता लेकिन अब शादी, मंगनी के साथ-साथ हर खुशी के मौके पर केक काटा जाता है। तरह तरह के रंगीन और फ्लेवर वाले केक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को पसंद होते हैं। लेकिन अगर आपको बताया जाए कि आपका पसंदीदा केक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को बढ़ा रहा है तो?

जी हां, एक रिपोर्ट में हुए खुलासे के अनुसार केक से कैंसर होने की संभावना कई गुना तक बढ़ जाती है। इस रिपोर्ट के अनुसार जांच के दौरान केक में कुछ ऐसे तत्व पाए गए हैं जो कैंसर के जोखिम में वृद्धि कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक खाद्य सुरक्षा गुणवत्ता विभाग ने लोगों को केक खरीदते समय सावधानी बरतने के लिए कहा है। साथ ही विभाग ने कर्नाटक राज्य की सभी बेकरी की दुकानों पर केक बनाने में इस्तेमाल कैंसरकारी पदार्थ को लेकर भी चेतावनी दी है।

बेंगलुरु में एक परीक्षण के दौरान केक की अलग-अलग 12 किस्मों में कैंसर पैदा करने वाले तत्वों पाए गए हैं। केक में कैंसर कारक तत्व पाए जाने के बाद विभाग की चिंता बढ़ी है। साथ ही लोगों के मन में भी केक खरीदने को लेकर डर पैदा हो गया है। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है जब उठाने की सामग्री में कैंसर कारक तत्वों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। 

केक से कैंसर कैसे हो सकता है
केक की लोकप्रिय वैरायटी जैसे, रेड वेलवेट और ब्लैक फॉरेस्ट में अक्सर कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। ये कृत्रिम रंग केक को आकर्षक और स्वादिष्ट बनते हैं। लेकिन साथ ही कैंसर का खतरा भी पैदा कर सकते हैं। केकं के सैंपल्स की टेस्टिंग के दौरान एल्यूरा रेड, सनसेट येलो,  एचसीएफ, पोंसो 4आर, टैट्राजीन और कर्मोइसिन जैसे कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल की बात सामने आई है जो कि सेहत के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।

केक से पहले इन खाद्य पदार्थों पर भी अलर्ट
खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक कलर के इस्तेमाल को लेकर इससे पहले भी अलर्ट जारी किए जा चुके है। पूर्व में कर्नाटक सरकार ने कॉटन कैंडी में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंगों पर रोक लगा दी थी। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग में कॉटन कैंडी और गोभी मंचूरियन में रोटामाइन बी फूड कलरिंग एजेंट के इस्तेमाल को खतरनाक बताया था। रोटामाइन बी को कैंसर कारक माना जाता है। इसके बाद विभाग में इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए आदेश दिए थे।
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केक में इस्तेमाल फूड कलर्स के नुकसान
जांच में केक के कुछ सैम्पल्स में रोटामाइन-बी पाया गया है। असल में रोटामाइन-बी  का इस्तेमाल कपड़ों को रंगने के लिए किया जाता है लेकिन अब इसका उपयोग फूड कलर के रूप में भी होने लगा है। रोटामाइन-बी से फूड पॉइजनिंग के अलावा और भी कई गंभीर प्रकार की बीमारियां हो सकती है। अध्ययन में रोटामाइन को कैंसर जन्य भी बताया गया है।

इसके अलावा रिपोर्ट में केक में इस्तेमाल एक और इंग्रेडिएंट पोंसो 4आर को भी खतरनाक पाया गया है। एक अन्य रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पोंसो 4आर बच्चों में अति सक्रियता बढ़ाने और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण बनने वाला पाया गया है।

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