Hanuman Chalisa

ध्यान की कला: स्वयं की खोज की ओर एक यात्रा

अनिरुद्ध जोशी
शनिवार, 20 दिसंबर 2025 (15:36 IST)
प्रतिवर्ष 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत 2024 से हुई जब संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया है। ध्यान को अंग्रेजी में मेडिटेशन कहते हैं लेकिन इसके लिए यह सही शब्द नहीं है। अवेयरनेस इसके ज्यादा करीब है। 
 
ध्यान की कला: स्वयं की खोज की ओर एक यात्रा
"ध्यान हमारा स्वभाव है, जिसे हमने संसार की चकाचौंध में कहीं खो दिया है।"- ओशो
 
अक्सर लोग पूछते हैं कि ध्यान कैसे करें? यह सवाल वैसा ही है जैसे पूछना कि 'कैसे जिएं' या 'कैसे प्यार करें'। जिस तरह हंसना और रोना सीखा नहीं जाता, वैसे ही ध्यान भी सिखाया नहीं जाता; इसे बस पुनः खोजा जाता है।
 
ध्यान के चार मूलभूत स्तंभ:-
यदि आप ध्यान की शुरुआत करना चाहते हैं, तो इन चार तत्वों पर ध्यान देना अनिवार्य है:
1. श्वास की गति (Breath)
2. मानसिक हलचल (Mental Chatter)
3. ध्यान का लक्ष्य (Object of Focus)
4. होशपूर्वक जीना (Mindful Living)
 
1. श्वास की गति: (भीतर और बाहर का सेतु)
श्वास ही वह कड़ी है जो हमें बाहरी दुनिया से आंतरिक जगत से जोड़ती है।
गति का विज्ञान: क्रोध में श्वास तेज होती है, शांति में धीमी। श्वास को नियंत्रित कर आप अपने मन और आयु, दोनों को नियंत्रित कर सकते हैं।
ध्यान में उपयोग: जब मन भटके, तो बस अपनी आती-जाती श्वास पर ध्यान टिका दें। गहरी श्वास लेना और उसे धीरे-धीरे छोड़ना मस्तिष्क को स्थिर कर देता है।
 
2. मानसिक हलचल: (विचारों के शोर को थामना)
ध्यान में जाने के लिए मन की गति को समझना जरूरी है। विचारों और कल्पनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए ये 3 सरल उपाय अपनाएं:
पुतलियों की स्थिरता: आंखें बंद करें और अपनी पुतलियों को हिलने न दें।
जीभ को विराम: ध्यान के दौरान अपनी जीभ को बिल्कुल स्थिर रखें।
तत्काल सजगता: जैसे ही कोई विचार आए, बिना जोर-जबरदस्ती के उसके प्रति सजग हो जाएं और सोचना बंद कर दें।
 
3. ध्यान के प्रकार और लक्ष्य:  
आप अपनी रुचि के अनुसार 'आकार' या 'निराकार' विधि चुन सकते हैं:-
निराकार ध्यान: बंद आंखों के सामने के अंधेरे को देखें या सन्नाटे की गूंज (ॐ की ध्वनि) को सुनने का प्रयास करें। यह आपको शून्यता और गहरे मौन से जोड़ता है।
आकार ध्यान: किसी प्राकृतिक दृश्य, पहाड़ या अपने इष्टदेव की कल्पना करें। यह शुरुआती साधकों के मन को भटकने से रोकने में कारगर है।
 
4. होशपूर्वक जीना: (यंत्रवत जीवन से मुक्ति)
क्या आप वाकई होश में जी रहे हैं? अक्सर हम मशीन की तरह काम करते हैं- गाड़ी चलाते वक्त या चलते वक्त हमारा मन कहीं और होता है।साधना: जो भी कार्य करें, पूरे होश के साथ करें। महसूस करें कि आपका हाथ कहाँ है, पैर कहाँ हैं।
द्रष्टा भाव: खुद को 'गूगल अर्थ' की तरह देखें। कल्पना करें कि कोई ऊपर से आपको देख रहा है- वह 'कोई' और नहीं, आपका अपना ही जागरूक स्वरूप है।सार: इस यंत्रवत (Automatic) जीवन को छोड़ देना और हर क्षण के प्रति जागृत हो जाना ही वास्तविक ध्यान है।
 
 
 

Show comments

सभी देखें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

सभी देखें

सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

अगला लेख