Hanuman Chalisa

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध क्यों हो रहा है?

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 18 जून 2025 (15:49 IST)
iran israel yudh kyu ho raha hai: 13 जून 2025 को मध्य-पूर्व में एक नई और बेहद खतरनाक स्थिति जन्म ले चुकी है। इस दिन इजराइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” नामक बड़ी सैन्य हमले की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य था ईरान के परमाणु और मिसाइल सुविधाएं, साथ ही IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर) के उच्च पदस्थ कमांडर। इजराइल ने इसे एक "प्रारंभिक हमले" कहा, ताकि ईरान के पास परमाणु हथियार या लंबी दूरी के मिसाइलों का निर्माण शुरू होने से पहले ही उसकी क्षमता को कमजोर किया जा सके। यह हमला लंबे समय से चल रही तनावपूर्ण दृश्यता का सीधा परिणा था, सौ वर्षों से चले आ रहे सहजीवन में अब सीधा टकराव हो गया था।
 
वर्षों का तनाव: ईरान और इज़राइल के बीच तनाव कोई नया विषय नहीं है, यह दशकों पुरानी विरोध की कहानी है। ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही उसने इज़राइल को अपनी अस्तित्व की समस्या माना । अगले कई वर्षों में ईरान ने गुप्त रूप से परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों को तेज़ किया, जिसे इज़राइल एक "एक्सिस्टेंशियल थ्रेट" (अस्तित्वगत खतरा) मानता रहा।
 
हालिया अध्ययनों में ईरान की 60% यूरेनियम समृद्धि की पुष्टि की गई एक ऐसी तेज़ी जिससे संभवतः हथियार-स्तरीय यूरेनियम बनने की राह खुल सकती है। यही सिलसिला कई सालों से चल रहा था और अंत में इज़राइल ने “अब और नहीं” कह दिया।
 
इजराइल का सैन्य अभियान: इजराइल ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से "ऑपरेशन राइजिंग लायन" शुरू किया। माना जा रहा है कि मिशन की शुरुआत मसाद (Mossad) ने करतूतों (drone sabotage) से की उनके निशाने पर आईआरजीसी की मिसाइल लॉन्चर सिस्टम और एयर डिफेंस बैटरियां थीं। इसके बाद IAF (Israeli Air Force) द्वारा बड़े पैमाने पर हमला किया गया नाटंज, इस्फाहान, तेहरान, ताबरीज़ जैसे कई मिसाइल/परमाणु स्थलों पर बमबारी और हवाई हमले किए गए।
 
इस हमले में हज़ारों हथियार-उपकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड सेंटर क्षतिग्रस्त हो गए, इजराइल की इस कार्रवाई से फेजेबैक इतना मजबूत रहा कि इन्होंने ईरान के अधिकतर बैलिस्टिक क्षमता को उलझा दिया।
 
ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने प्रतिक्रिया में तेज़ी से गोलाबारी शुरू कर दी। उन्होंने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन इज़राइल के शहरों खासकर त्ल अविव, जैरुसलम, हाइफ़ा की ओर छोड़ दीं, जिससे कई नागरिक प्रभावित हुए। हालांकि इजराइल के 'आयरन डोम' रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को रोक लिया, फिर भी नुकसान बच नहीं पाया कुछ मिसाइलों और ड्रोन की वजह से शहरों में तबाही व मानव हानि हुई ।
 
वैश्विक स्थिति और मध्य-पूर्व की जटिल तस्वीर: इस संघर्ष ने तुरंत तेहरान में नागरिकों में आतंक और पलायन का दौर शुरू कर दिया। 100,000 से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। संयुक्त राष्ट्र, EU और ICRC ने तुरंत रक्षा कवच और मानवीय मदद आपूर्ति की मांग की। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने विमानों और पोतों की मौजूदगी बढ़ा दी, जबकि ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान की 'अनकंडीशनल सरेंडर' की ज़रूरत है।
 
भविष्य की राह: युद्ध या कूटनीति: विश्लेषकों का मानना है कि इज़राइल के हमले में दीर्घकालिक असर होगा, उन्होंने सुस्त परमाणु सुविधाओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया, लेकिन पूरी तरह से नष्ट नहीं किया। यदि अमेरिकी सहयोग न हो, तो ईरान फिर से संभावित हथियार विकास की दिशा पकड़ सकता है। वहीं, डॉनल्ड ट्रम्प का समर्थन और CENTCOM में इजराइल का समावेश इस गतिरोध को और जटिल बना रहा है।
 
इस मोड़ पर युद्ध की गम्भीर संभावनाएं हैं, लेकिन शांति की डोर अभी टूट नहीं पाई है, जिनके लिए कूटनीतिक प्रयासों, परमाणु वार्ताओं और मानवीय मध्यस्थता की उम्मीद बची हुई है।
ALSO READ: एसएससी कॉन्स्टेबल जीडी के रिजल्ट घोषित, जानिए इसके बाद क्या होता है परीक्षा का अगला चरण
लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

क्या मस्क बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति?

भारत में अब भी कैसे जारी है हर दिन 16 महिलाओं की दहेज हत्या?

नार्वे में पत्रकारिता या पब्लिसिटी स्टंट?

बंगाल में राजनीतिक हिंसा रोकना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

ईरान युद्ध: कितनी असरदार है भारत की बहु-पक्षीय रणनीति?

सभी देखें

गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में आरक्षण लागू करने की तैयारी में सरकार

CM योगी का 150 लोगों को भरोसा, निश्चिंत रहें सबकी समस्याओं पर होगा एक्शन

योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत नकली दवा फैक्ट्री पर छापा, दो गिरफ्तार

अगला लेख