ये 25 'महामानव' जिन्होंने बनाया भारत को

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
शकारि विक्रमादित्य द्वितीय  कुन्तल सातकर्णि  : महाराष्ट्र में सातवाहन राजाओं ने देर तक शकों के आक्रमण को रोके रखा। वीम के काल में जब शकों का जबरदस्त आक्रमण हुआ तो द्वितीय विक्रमादित्य का प्रादुर्भाव हुआ, जिसने इन नवागत शकों को परास्त कर दूसरी बार शकारि की उपाधि ग्रहण की। इस प्रतापशाली राजा का नाम कुन्तल सातकर्णि था। इसने मुलतान के समीप राजा विम की सेनाओं को परास्त कर कर दिया था। विक्रमादित्य द्वितीय बड़ा ही प्रतापी राजा था। उसकी रानी का नाम मलयवती था। सातवाहन राजा प्राकृत भाषा बोलते थे, पर कुन्तल सातकर्णि की रानी मलयवती की भाषा संस्कृत थी।
 
वात्स्यायन के कामसूत्र में उसका उल्लेख आया है। कुन्तल सातकर्णि (विक्रमादित्य द्वितीय) के राजदरबार में गुणाढ्य नाम का प्रसिद्ध लेखक व कवि रहता था। जिसने प्राकृत भाषा का प्रसिद्ध ग्रंथ 'बृहत्कथा' लिखा था।
 
संस्कृत ग्रंथ कथासरित्सागर के अनुसार विक्रमादित्य द्वितीय का साम्राज्य सम्पूर्ण दक्खन, काठियावाड़, मध्य प्रदेश, बंग, अंग और कलिंग तक विस्तृत था, तथा उत्तर के सब राजा, यहां तक कि काश्मीर के राजा भी उसके अधिन थे। अनेक दुर्गों को जीतकर उसने शकों का उसने संहार किया था। शको का संहार करके उसने उज्जयिनी में एक बड़ा उत्सव किया गया, जिसमें गौड़, कर्नाटक, लाट, काश्मीर, सिन्ध आदि के अधीनस्थ राजा सम्मिलित हुए। तब विक्रमादित्य-2 का एक बहुत शानदार जुलूस निकला, जिसमें इन सब राजाओं ने भाग लिया था।
 
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