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सरकार मगरूर है मगर विपक्ष तो भी नाकारा है!

रविवार,जून 20, 2021
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ग़ैर-भाजपाई विचारधारा वाले दलों से चुनिंदा नेताओं को भाजपा में शामिल कर विपक्षी सरकारों को गिराने या चुनाव जीतने की कोशिशों पर जताई जाने वाली नाराज़गी और नज़रिए में थोड़ा-सा बदलाव कर लिया जाए तो जो चल रहा है, उसे बेहतर तरीक़े से समझा जा सकता है। ...
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के 2 वर्ष पूरे कर चुके हैं लेकिन इन 2 सालों में वे अपने मंत्रिपरिषद को भी पूरी तरह आकार नहीं दे पाए हैं। उनकी सरकार का तीसरा साल शुरू हो चुका है लेकिन अभी भी आधी-अधूरी मंत्रिपरिषद से ही काम चल रहा है। ...
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उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का सियासी संग्राम निर्णायक दिशा में बढ़ रहा है। सर्वशक्तिमान नरेंद मोदी को सीधी चुनौती देकर योगी आदित्यनाथ ने सात लोक कल्याण से लेकर केशव कुंज तक को हलकान कर दिया है। असली लड़ाई सिर्फ़ लखनऊ तक सीमित नहीं है बल्कि ...
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दुनिया के तमाम देशों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सरकार ने कोरोना की वैश्विक महामारी से निबटने के सिलसिले में हर फैसला अपने राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर और अपनी छवि चमकाने के मकसद से किया है। यही वजह है कि इस समय देश में चौतरफा ...
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प्रकृति ने जल और जंगल के रूप में मनुष्य को 2 ऐसे अनुपम उपहार दिए हैं जिनके सहारे कई दुनिया में कई सभ्यताएं विकसित हुई हैं, लेकिन मनुष्य की खुदगर्जी के चलते इन 2 नों ही उपहारों का तेजी से क्षय हो रहा है। पानी के संकट को स्पष्ट तौर पर दुनियाभर में ...
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4 जून इंटरनेशनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रन विक्टिम्स ऑफ अग्रेशन यानी दुनिया भर में हिंसा का शिकार हुए बच्चों का अंतराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। फिर चाहे यह अग्रेशन यानी आक्रामक व्यवहार उन्हें समाज में मिलता हो, घर में मिलता हो या विद्यालय में मिलता हो। ...
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केंद्र सरकार के बनाए 3 कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसानों के आंदोलन को 6 महीने पूरे हो चुके हैं। यह आंदोलन न सिर्फ मोदी सरकार के कार्यकाल का, बल्कि आजाद भारत का ऐसा सबसे बड़ा आंदोलन है, जो इतने लंबे समय से जारी है। देश के कई राज्यों के किसान ...
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भारत में नौकरशाही तो राजनीतिक सिस्टम का हिस्सा बहुत पहले से बनती रही है। आर्थिक, वैदेशिक और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और सलाहकार भी सरकार के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की भाव-भंगिमा के अनुरूप सलाह देते रहे हैं, लेकिन कोरोना महामारी के दौर में यह पहली बार ...
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वैश्विक महामारी का इतिहास का इतिहास बहुत ही लंबा चौड़ा है। प्राचीन काल में तो कई तरह की अज्ञात रोगों का जन्म होता था जिनका तो आज तक कोई नाम भी नहीं जानता है। बस यही जानते हैं कि उस काल में महामारी फैली थी जिसके चलते लाखों लोग मारे गए हैं। आजकल ...
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एक तरफ दुनिया के दुनिया के तमाम छोटे-बड़े और अमीर-गरीब सभ्य देश हैं जिन्होंने भारत में कोरोना महामारी के चलते अस्पतालों में मरीजों की भीड़, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं के अभाव में असमय दम तोड़ रहे लोगों, श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए लगीं कतारों, जलती ...
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अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है। इसके संस्थापक हेनरी ड्यूनेंट के जन्मदिन पर यह दिन मनाया जाता है। हेनरी ड्यूमेंट के प्रयासों से 1864 में जेनेवा समझौते
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दुनियाभर में साल में दो दिन पृथ्वी दिवस मनाया जाता है (21 मार्च और 22 अप्रैल) लेकिन, 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस का सामाजिक तथा राजनीतिक महत्व है।
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दुनिया के अधिकांश देशों में अब 22 अप्रैल को ही वर्ल्ड अर्थ-डे मनाया जाने लगा है। दरअसल यह दिवस अमेरिकी सीनेटर गेलार्ड नेल्सन की दिमाग की उपज है जो कई वर्षों से
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22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस है। इस साल विश्व पृथ्वी दिवस 2021 की थीम है रिस्टोर द अर्थ। पूरे विश्व में यह दिन हर साल मनाया जाता है।
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घर में फालतू का सामान बहुत होता है और छूट जाती है वे जरूरी वस्तुएं जो हमारे जीवन में संकट के दौरान काम में आती है। कोरोना वायरस जैसे महामरी के दौर में आप अपने घर में रखें ये 15 वस्तुएं जो बहुत काम आएगी।
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जलियांवाला बाग हत्याकांड ब्रिटिश काल के अंत और इतिहास का सबसे काला दिन। 13 अप्रैल, 1919 को वैसाखी के दिन 1000 निहत्थे भारतीयों को गोलियों से भून दिया गया था।
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प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को लोग अप्रैल फूल (ऑल फ़ूल्स डे) मनाते या कहें कि बनाते हैं। इस दिवस का प्रचलन ज्यादा तर पश्चिमी देशों में रहा है। पश्चिम का अनुसरण करते हुए अब भारतीय लोग भी इस दिवस को मनाने लगे हैं। हालांकि इसमें मनाने जैसा कुछ भी नहीं होता ...
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भारत में पहले से ही ढहती अर्थव्यवस्था और उसके चलते बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और खेती की बर्बादी जैसी आम आदमी की तमाम दुश्वारियों के बीच कोरोना के खौफ, बीमार स्वास्थ्य सेवाएं, लोगों की मौतें, लॉकडाउन, औद्योगिक शहरों से बड़े पैमाने पर प्रवासी कामगारों के ...
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हम छोटी छोटी बातों पर गौर करें और विचार करें तो हम जल संकट की इस स्थिति से निपट सकते हैं। ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख मैं यहां करना चाहूंगा। कुछ सूक्ष्म दैनिक उपयोग की बातें है जिन पर ध्यान देकर जल की बर्बादी को रोका जा सकता है।
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