Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

दक्षिण अफ्रीका में हुए अध्ययन से हुआ खुलासा, 'ओमिक्रॉन' डेल्टा से कम खतरनाक

गुरुवार, 23 दिसंबर 2021 (12:16 IST)
जोहानिसबर्ग। कोरोनावायरस का नया स्वरूप 'ओमिक्रॉन' वायरस के पहले स्वरूपों से कम गंभीर प्रभाव वाला लगता है। दक्षिण अफ्रीका में एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। 'ओमिक्रॉन' स्वरूप की पहचान सबसे पहले पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका में ही की गई थी और इसके प्रभाव को लेकर व्यापक स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है।

ALSO READ: दुनिया के इन देशों में कहीं लॉकडाउन तो कहीं लगे प्रतिबंध, जानिए किस देश में क्‍या है ओमिक्रॉन का हाल?
 
विटवाटर्सरैंड विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान की प्रोफेसर शेरिल कोहिन ने बुधवार को 'नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज' (एनआईसीडी) द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन वार्ता में 'दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन स्वरूप की गंभीरता का प्रारंभिक आकलन' शीर्षक वाले एक अध्ययन के परिणाम साझा किए।

ALSO READ: तमिलनाडु में ओमिक्रॉन धमाका, 1 ही दिन में मिले 33 मरीज, अब तक 280 लोग नए वैरिएंट की चपेट में
 
कोहिन ने कहा कि उपसहारा अफ्रीकी क्षेत्र के अन्य देशों में स्थिति कमोबेश समान रह सकती है, जहां पिछले स्वरूपों का खतरनाक असर देखने को मिला था। उन देशों में स्थिति समान नहीं हो सकती है, जहां पिछले स्वरूपों का असर काफी कम रहा था और टीकाकरण की दर अधिक है।
 
एनआईसीडी की जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ वासीला जस्सत ने इस बात को स्पष्ट किया कि कैसे 'ओमिक्रॉन' स्वरूप की वजह से आई वैश्विक महामारी की चौथी लहर, पिछली लहर से अधिक खतरनाक नहीं है। चौथी लहर में पहले 4 सप्ताह में संक्रमण के मामले काफी अधिक आए। पिछली लहर की तुलना में 3,66,000 से अधिक मामले सामने आए।
 
जस्सत ने बताया कि 4थी लहर में केवल 6 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि पिछली लहरों में 16 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जस्सत ने कहा कि इसका मतलब है कि मामले अधिक थे, लेकिन अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आई। पिछली लहरों की तुलना में इस बार अस्पताल में भर्ती कराए गए मरीजों की दर काफी कम थी।
 
उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से संक्रमित हुए मरीजों की दर भी पहले की तुलना में कम थी। चौथी लहर में 6 प्रतिशत मरीजों की मौत संक्रमण से हुई जबकि 'डेल्टा' स्वरूप के कारण आई पिछली लहर में करीब 22 प्रतिशत मरीजों की जान गई थी। जस्सत ने बताया कि अधिकतर मरीज औसतन 3 दिन ही अस्पताल में भर्ती रहे।
 
उन्होंने कहा कि इस चौथी लहर का प्रकोप कई अन्य कारणों से भी शायद कम रहा, जैसे टीकाकरण के कारण लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता थी या 'ओमिक्रॉन' के कम संक्रामक होने के कारण भी ऐसा हो सकता है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए हमें और अध्ययन करने की जरूरत है।

Show comments

डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दी धमकी, बोले- चाहूं तो सबको खत्म कर दूं.. ईरान ने भी किया तीखा पलटवार

अमित शाह के दौरे से पहले कोलकाता में बवाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का चबूतरा तोड़ा, मामले पर क्‍या बोली भाजपा?

ममता बनर्जी ने संभाली TMC की कमान, बागी नेताओं को दी चुनौती, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा...

उन्हें पता है बॉस कौन है, नेतन्याहू पर ट्रंप का बड़ा बयान, व्हाइट हाउस में जल्द हो सकती है मुलाकात

ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले PM मोदी को मिली धमकी, आरोपी के IP एड्रेस की हुई पहचान, जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

सभी देखें

अयोध्‍या चढ़ावा विवाद को लेकर सोमवार को होगी ट्रस्‍ट की बैठक, ट्रस्टी चंपत राय समेत कई अहम मुद्दों पर होगा फैसला

योगी सरकार की निःशुल्क IAS-PCS आवासीय कोचिंग योजना का बढ़ा क्रेज

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए योगी सरकार ने दी 210 करोड़ की सब्सिडी, 43 हजार से अधिक लोगों को मिला लाभ

अमित शाह के दौरे से पहले कोलकाता में बवाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का चबूतरा तोड़ा, मामले पर क्‍या बोली भाजपा?

गाजियाबाद में चलती कार में 'क्लिनिक', अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार

अगला लेख