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खंडवा से Groud Report : लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं लोग, पुलिस भी मुस्तैद

Updated: सोमवार, 30 मार्च 2020 (15:21 IST)
-प्रतीक मिश्रा, खंडवा से 
खंडवा में आमजन जिला प्रशासन द्वारा सुबह 8 बजे से 1 बजे तक तय किए गए समय में अपनी जरूरत के सामान की खरीदी कर रहे हैं। सब्ज़ी-फल इत्यादि के लिए शहर की सभी सब्ज़ीमंडियों को तत्काल प्रभाव से बंद कर स्टेडियम ग्राउंड को अस्थाई सब्ज़ीमंडी में तब्दील कर दिया गया है।
 
भीड़ ने उड़ाई व्यवस्था की धज्जियां : स्टेडियम में बनाई गई सब्ज़ी मंडी में सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर खरीदी करने की व्यवस्था भी बनाई गई थी, लेकिन लोगों की भीड़ ने पहले ही दिन इस व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। 
 
दोपहर 1 बजे के बाद न चाहते हुए भी पुलिस को लॉकडाउन का पालन सख्ती से करवाना पड़ रहा है, शहर की तंग गलियों में युवा झुंड बनाकर बतियाते भी दिख जाते हैं। पुलिस ऐसे युवाओं को अपने हिसाब से ट्रीट कर रही है, वहीं देशभर की तरह दिहाड़ी मजदूरों का पलायन खंडवा के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है।
इंदौर के रास्ते मजदूर खंडवा तक पंहुच रहे हैं, जिससे खतरा बना हुआ है। लॉकडाउन में ज्यादातर युवा फ़ोन पर आश्रित हो गए हैं। PUBG तथा अन्य मोबाइल गेम समय काटने का सहारा बन चुके हैं। कई परिवारों में बरसों से धूल खा रहे कैरम बोर्ड इस वक्त अहम साबित हो रहे हैं, वहीं चेस, सार, लूडो जैसे गेम भी खूब काम आ रहे हैं। 
 
मोबाइल स्पीड ने दम तोड़ा : मोबाइल इंटरनेट का फ्रीक्वेंट यूज़ बढ़ने के कारण इंटरनेट का गोला घूमता ही रहता है, स्पीड़ ने दम तोड़ा दिया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो यहां भी लोग घरों में रहना पसंद कर रहे है, लेकिन शाम को लगने वाली चौपाल भला कौन रोक सकता है।
 
दूसरी तरफ अफवाहों से लोग ज्यादा परेशान हैं, नागरिक पत्रकारिता भी चरम पर है। हर कोई कॉपी पेस्ट के जरिये भ्रामक सूचनाओं का आदान-प्रदान व्हाट्सएप-फेसबुक के जरिये कर रहा है, जिससे असली पत्रकार थोड़े परेशान हैं। 
शहर में 1 कोरोना संदिग्ध : शहर में कोरोना का एक संदिग्ध होने की बात भी सामने आई है, जिसके सेम्पल जांच के लिए भेजे जा चुके है। हालांकि इस पर भी जिला प्रशासन चुप्पी साधे हुए है, इधर शहर में कोई भूखा ना सोये इसके लिए समाजसेवी भी आगे आ गए है।
 
गरीब तबके के रोज़ कमाने खाने वाले लोगों के लिए रसद का दान-पुण्य भी किया जा रहा है। कलेक्टर-एसपी भी समय-समय पर हालातों का जायजा लेने निकलते रहते हैं। वहीं जनप्रतिनिधि भी अपनी-अपनी सरकारी निधि से रिलीफ़ फंड में पैसे दे रहे हैं। ये वही निधि होती है जो टेक्स के पैसों से जारी होती है। 
 

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