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Last Updated : शुक्रवार, 24 सितम्बर 2021 (00:14 IST)

INSACOG ने कहा- देश में SARS-CoV2 के नए वैरिएंट का कोई साक्ष्य नहीं...

INSACOG ने कहा- देश में SARS-CoV2 के नए वैरिएंट का कोई साक्ष्य नहीं... - INSACOG said, no evidence of new variant of SARS-CoV2 in the country
नई दिल्ली। कोरोनावायरस (Coronavirus) का जीनोम अनुक्रमण और विश्लेषण कर रही प्रयोगशालाओं के एक समूह आईएनएसएसीओजी ने कहा है कि सार्स-सीओवी 2 के नए स्वरूप का कोई प्रमाण नहीं है और अभी डेल्टा उप-स्वरूपों को लेकर कोई अतिरिक्त या सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता नहीं है।

आईएनएसएसीओजी ने 20 सितंबर के अपने ताजा बुलेटिन में कहा कि डेल्टा भारत में चिंता का मुख्य स्वरूप बना हुआ है। समूह ने कहा कि दूसरी लहर डेल्टा स्वरूप से प्रभावित थी और कुछ राज्यों में निम्न स्तर पर बना हुआ है तथा किसी नए स्वरूप का कोई सबूत नहीं है।

देश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर के दौरान मार्च से मई के बीच अस्पतालों और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे पर काफी दबाव बना हुआ था। आईएनएसएसीओजी ने ध्यान दिलाया किया कि जून 2021 से एवाई.1 में मामूली वृद्धि हुई है और इसकी निगरानी की जा रही है। समूह ने कहा कि एवाई.4 भारत के साथ ही विश्व स्तर पर हाल के अनुक्रमण में सबसे अधिक बार मिलने वाला डेल्टा उप-स्वरूप है।

पिछले सप्ताह समूह ने कहा था कि अभी तक सार्स-सीओवी2 के दो नए स्वरूप एमयू और सी.1.2 नहीं दिखे हैं तथा डेल्टा मुख्य स्वरूप बना हुआ है। भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) विभिन्न राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का एक समूह है जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले साल गठित किया था। आईएनएसएसीओजी तब से कोरोनावायरस के जीनोम अनुक्रमण और वायरस का विश्लेषण कर रहा है।

क्या बच्चों के लिए Coronavirus का Delta वैरिएंट ज्यादा खतरनाक है : क्या कोरोनावायरस का डेल्टा स्वरूप बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है? विशेषज्ञों का कहना है कि इस बारे में ठोस साक्ष्य नहीं हैं कि बच्चे और किशोर कोविड-19 के पूर्व के स्वरूपों की तुलना में डेल्टा स्वरूप से ज्यादा गंभीर रूप से बीमार पड़ेंगे, हालांकि डेल्टा स्वरूप से बच्चों में संक्रमण में तीव्र वृद्धि हुई है क्योंकि यह कहीं अधिक संक्रामक है।
फ्लोरिडा के सेंट पीटर्सबर्ग में जॉन्स हॉपकिन्स ऑल चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में शिशु संक्रामक रोग चिकित्सक डॉ. जुआन डुमोइस ने कहा कि कहीं अधिक आसानी से फैलने की डेल्टा की क्षमता उसे बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक बनाती है और यह स्कूलों में मास्क पहनने तथा किशोरों के भी टीकाकरण करने की जरूरत बताता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल एसोसिएशन से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी बच्चों में साप्ताहिक संक्रमण की दर इस महीने की शुरूआत में ढाई लाख पहुंच गई। महामारी की शुरूआत होने के बाद से अमेरिका में 50 लाख से अधिक बच्चे संक्रमित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कम से कम 180 देशों में डेल्टा स्वरूप की पहचान की गई है।(भाषा)
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