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आईआईटी दिल्ली ने विकसित किया वायरसरोधी ‘नैनोशोट स्प्रे’

Updated: मंगलवार, 27 अप्रैल 2021 (14:48 IST)
नई दिल्ली, देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अपना कहर बरसा रही है जिसके कारण देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की भयावहता को आंकड़ो की मदद से समझने की कोशिश करे तो वर्ष 2020 में जब देश में कोरोना संक्रमण की पहली लहर थी उस समय कोरोना संक्रमितों की दैनिक अधिकतम संख्या एक लाख के पार नही हुई थी वहीं, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में यह संख्या तीन लाख के पार पहुंच गई है और इसमें लगातार इजाफा हो रहा है।

दरअसल जब कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है तो उसके सिर्फ एक बार खांसने और छीकने से मुंह से करीब तीन हजार सूक्ष्म बूंदें निकलती हैं जिन्हें ड्रॉपलेटस कहा जाता है। यह छोटी-छोटी बूंदें आस-पास रखे सामान, कपड़ों आदि की सतह पर गिरती हैं। इन ड्रॉपलेटस में वायरस छुपा होता है। इन ड्रॉपलेटस के संपर्क में आने से अन्य लोगों को भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा रहता है।

ऐसे में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के स्टार्ट-अप ‘रामजा जेनोसेंसर’ ने एक ऐसा स्प्रे बनाया है जिसका इस्तेमाल फर्श, कपड़े और बर्तन को छोड़कर हर सतह पर किया जा सकता है। इस स्प्रे की खास बात यह है कि इसका असर 96 घंटे यानि चार दिन तक बना रहता है। इसके साथ ही यह स्प्रे एल्‍कोहल फ्री है। ‘रामजा जेनोसेंसर’ ने इस स्प्रे को ‘नैनोशोट स्प्रे‘ नाम दिया है।

‘रामजा जेनोसेंसर’ की संस्थापक डॉ पूजा गोस्वामी ने इंडिया साइंस वायर से खास बातचीत में कहा है कि ‘नैनोशोट स्प्रे‘  में किसी भी प्रकार के टॉक्सिक पदार्थ नही हैं। उन्होने बताया कि हमने इसको बनाने के लिए कुछ चुनिंदा नैनोपार्टिक्ल का इस्तेमाल किया है जो जैविक यानि ऑर्गेनिक है। उन्होने बताया कि अन्य स्प्रे की तुलना में ‘नैनोशोट स्प्रे‘ में हाइपोक्लोराइट और एल्काहोल नही है। और यह प्रमाणित भी हो चुका है। इसके साथ ही उन्होने बताया कि यह पूरी तरह से नॉन-टॉक्सिक है और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में टेस्ट के दौरान कोई एलर्जी रिएक्शन भी नही देखा गया।

‘नैनोशोट स्प्रे‘ के इस्तेमाल करने के 30 सेकंड के भीतर यह वायरस, बैक्टीरिया, रोगाणुओं, कवक को मारना शुरू कर देता है और 10 मिनट में 99.9 फीसदी रोगाणुओं को मारने में सक्षम है। इस स्प्रे का इस्तेमाल कपड़े और बर्तन को छोडकर हर जगह किया जा सकता है। जैसे घर के सोफे, कुर्सियों, मेट्रो, बस, रेलवे, एयरपोर्ट जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही रसोई के स्लैब, बैग, बोतल, कांच की वस्तुओं, आदि पर भी किया जा सकता है।

डॉ पूजा गोस्वामी ने कहा है कि जर्म-फ्री सतहों और उचित स्वच्छता हमारी प्राथमिकता है। चूंकि ‘नैनोशोट स्प्रे‘  रोगाणुओं पर 99.9 फीसदी की इफिशिएंसी रेट से काम करता है और चार दिनों तक प्रभावी रहता है तो ‘नैनोशोट स्प्रे‘ को बार-बार प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है।

‘नैनोशोट स्प्रे‘ अलग- अलग तरह के तीन स्प्रे पैक में तैयार किया गया है। इस उत्पाद को फ्लिपकार्ट पर ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। (इंडिया साइंस वायर)

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